मेहबूबा मुफ्ती ने कृति सैनन की पोशाक और सुकैना रिज़वी के हिजाब विवादों के माध्यम से महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद के अधिकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि कपड़ों को किसी महिला के चरित्र या संस्कृति के प्रति वफादारी का पैमाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
- महिला की पोशाक उसकी व्यक्तिगत पसंद का विषय होनी चाहिए, न कि सामाजिक नियंत्रण का।
- कृति सैनन की आधुनिक पोशाक और सुकैना रिज़वी का हिजाब, दोनों ही महिला स्वायत्तता के दो अलग पहलू हैं।
- कपड़ों के आधार पर किसी महिला के चरित्र या देश के प्रति उसकी वफादारी का आकलन करना गलत है।
पूर्व जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती ने हाल ही में एक विचारोत्तेजक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने समाज के दोहरे मापदंडों पर कड़ा प्रहार किया है। मुफ्ती ने अभिनेत्री कृति सैनन के विज्ञापन विवाद और छात्रा सुकैना रिज़वी के हिजाब मामले को जोड़ते हुए यह सवाल उठाया है कि आखिर यह तय कौन करता है कि एक महिला को क्या पहनना चाहिए?
मुफ्ती अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि 1996 में अपने पहले चुनाव प्रचार के दौरान, उन्होंने महसूस किया कि कैसे कपड़ों की चिंता उनकी राजनीतिक अभिव्यक्ति में बाधा बन रही थी। उन्होंने बताया कि कैसे एक अबाया और हिजाब पहनने के बाद उन्हें पहली बार वास्तव में सहज और स्वतंत्र महसूस हुआ। उनके लिए, यह केवल धार्मिक मामला नहीं था, बल्कि आत्मविश्वास और सुरक्षा का विषय था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत में महिलाओं की पोशाक अक्सर एक राजनीतिक और सांस्कृतिक युद्धक्षेत्र बन जाती है। जब हम महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो हमें यह देखना होगा कि क्या हम उनकी उन पसंदों का भी समर्थन करते हैं जो हमारी स्थापित मान्यताओं को चुनौती देती हैं।
लेख में दो विपरीत छोरों की तुलना की गई है। एक तरफ कृति सैनन हैं, जिनकी एक विज्ञापन में पहनी गई पोशाक को 'अनुचित' बताकर आलोचना की गई। दूसरी ओर सुकैना रिज़वी हैं, जिन्होंने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
असली सशक्तिकरण यह नहीं है कि हम महिलाओं का जश्न तब मनाएं जब वे हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप हों, बल्कि यह है कि हम उनकी स्वतंत्रता का बचाव तब करें जब उनकी पसंद हमें असहज करे।
मुफ्ती का तर्क है कि कृति सैनन का नेकलाइन (neckline) यह तय नहीं करता कि वह भारतीय संस्कृति का सम्मान करती हैं या नहीं, और न ही सुकैना का हिजाब यह दर्शाता है कि वह देश के प्रति वफादार हैं या नहीं। कपड़ों को किसी महिला के चरित्र, नैतिकता या धर्म को आंकने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. कृति सैनन विवाद क्या था?
कृति सैनन के एक ज्वेलरी विज्ञापन में पहनी गई पोशाक को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद हुआ था, जिसे कुछ लोगों ने भारतीय संस्कृति के विरुद्ध बताया था।
2. सुकैना रिज़वी का मामला क्या है?
सुकैना रिज़वी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी कि उन्हें स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।