इंडिया टुडे के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता में कमी आई है, लेकिन इसका लाभ विपक्षी दल कांग्रेस को नहीं मिल पा रहा है। राहुल गांधी की रेटिंग में कोई खास सुधार नहीं देखा गया है।
- प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता रेटिंग में 6% की गिरावट दर्ज की गई है।
- विपक्ष और राहुल गांधी की रेटिंग में कोई महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई है।
- सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) के बावजूद कांग्रेस अभी भी संघर्ष कर रही है।
हालिया इंडिया टुडे 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वेक्षण के आंकड़े भारतीय राजनीति के एक दिलचस्प मोड़ की ओर इशारा कर रहे हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रेटिंग में पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय गिरावट आई है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरावट का सीधा लाभ विपक्षी खेमे, विशेष रूप से कांग्रेस को नहीं मिल रहा है।
मोदी की रेटिंग में गिरावट का विश्लेषण
जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की पसंदीदा प्रधानमंत्री के रूप में रेटिंग 54.7 प्रतिशत थी, जो अगस्त 2026 के सर्वेक्षण में गिरकर 48.7 प्रतिशत रह गई है। यह लगभग छह अंकों की बड़ी गिरावट है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट विपक्ष की मजबूती का संकेत नहीं है, बल्कि यह सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency) के उभरने का संकेत है।
विपक्ष की सुस्ती और राहुल गांधी की स्थिति
जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव दिख रहा है, वहीं विपक्ष के नेता राहुल गांधी की स्थिति लगभग स्थिर बनी हुई है। जनवरी में उनकी रेटिंग 26.6 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर मात्र 27.1 प्रतिशत हुई है। यह दर्शाता है कि मोदी और गांधी के बीच का अंतर कम तो हुआ है, लेकिन यह अंतर मोदी के समर्थन में कमी आने के कारण है, न कि राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़ने के कारण।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि भारतीय लोकतंत्र में 'एंटी-इनकंबेंसी' का होना एक स्वस्थ संकेत है, लेकिन यदि विपक्ष इस खाली स्थान (space) को भरने में विफल रहता है, तो राजनीतिक अस्थिरता या निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रभाव बढ़ सकता है। कांग्रेस के लिए यह एक आत्मनिरीक्षण का समय है कि क्यों जनता का असंतोष उनके पक्ष में वोट में तब्दील नहीं हो रहा है।
प्रधानमंत्री की रेटिंग में गिरावट केवल एक संकेत है कि जनता बदलाव चाहती है, लेकिन विपक्ष के पास अभी भी उस बदलाव को नेतृत्व देने का ठोस रोडमैप नहीं दिख रहा है।
ऐतिहासिक रूप से, भारत में जब भी सत्ता विरोधी लहर आती है, तब एक मजबूत वैकल्पिक शक्ति का उदय होता है। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अभी भी एक 'प्लेटो' (स्थिरता) पर अटके हुए प्रतीत होते हैं, जहाँ वे न तो बहुत नीचे गिर रहे हैं और न ही ऊपर उठ पा रहे हैं।
Frequently Asked Questions
1. मोदी की रेटिंग में कितनी गिरावट आई है?
जनवरी 2026 के 54.7% से गिरकर अगस्त 2026 में यह 48.7% हो गई है।
2. क्या राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़ी है?
नहीं, उनकी रेटिंग में केवल 0.5% की मामूली वृद्धि हुई है, जो लगभग स्थिर है।