पंजाब के ऐतिहासिक शहर बाबा बकाला में प्रमुख राजनीतिक दलों ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अपनी घेराबंदी शुरू कर दी है। कांग्रेस के आंतरिक कलह से लेकर AAP के विकास दावों और BJP की नई रणनीति तक, यहाँ चुनावी माहौल गरमा गया है।

  • बाबा बकाला में AAP, कांग्रेस, BJP और SAD की समानांतर रैलियां आयोजित की गईं।
  • कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर वर्चस्व की लड़ाई और आंतरिक गुटबाजी तेज हुई।
  • AAP ने महिला कल्याण योजनाओं और धार्मिक भावनाओं के संरक्षण पर जोर दिया।
  • BJP ने केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन और राज्य सरकार की विफलताओं को मुद्दा बनाया।

पंजाब के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले शहर बाबा बकाला में शुक्रवार को राजनीतिक हलचल चरम पर रही। सिख धर्म के नौवें गुरु, गुरु तेघ बहादुर जी से जुड़े इस पवित्र स्थल पर, 2027 के विधानसभा चुनावों से महीनों पहले सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह आयोजन केवल एक धार्मिक सभा नहीं, बल्कि पंजाब की बदलती राजनीतिक दिशा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया।

कांग्रेस: गुटबाजी और नेतृत्व का संकट

कांग्रेस के भीतर चल रहा आंतरिक संघर्ष बाबा बकाला में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर दरार को और गहरा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और श्री अकाल तख्त साहिब के अधिकार को चुनौती देने का आरोप लगाया। चन्नी ने मुख्यमंत्री आवास को 'भ्रष्टाचार का केंद्र' करार दिया। वहीं, सुखजिंदर सिंह रणधावा ने भी पार्टी के भीतर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बजाय सामूहिक भविष्य की रक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया।

आम आदमी पार्टी (AAP): कल्याणकारी योजनाओं का दावा

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए 'मावां-धीयां सतकार योजना' के तहत 5.3 लाख अतिरिक्त महिलाओं के बैंक खातों में 181.5 करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित करने की घोषणा की। मान ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) पर ऐतिहासिक गलतियां करने का आरोप लगाया और उन्हें भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए मजबूर बताया। उन्होंने 'आधुनिक मसंदों' और फर्जी पुजारियों पर भी निशाना साधा जो राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का शोषण कर रहे हैं।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, पंजाब में चुनावी मुकाबला अब केवल विकास बनाम भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक पहचान और प्रशासनिक जवाबदेही के बीच का संघर्ष बन गया है।

भाजपा (BJP): पहली बार एकल शक्ति प्रदर्शन

भारतीय जनता पार्टी ने बाबा बकाला में अपना पहला एकल कार्यक्रम आयोजित कर एक नया संकेत दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय व्यापार समझौते देश के कृषि हितों की रक्षा करेंगे। उन्होंने AAP सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि सरकार ने 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' को क्यों नहीं अपनाया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस मंच से राज्य में नशा और हथियारों की तस्करी को रोकने का संकल्प दोहराया।

शिराोमणि अकाली दल (SAD): धार्मिक पहचान की लड़ाई

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अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सुरक्षा एजेंसियों पर 'पंथ विरोधी' होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ शक्तियां पंजाब को 1980 के दशक के अशांत दौर में वापस ले जाने की कोशिश कर रही हैं। बादल का मुख्य ध्यान सिख समुदाय के वोट बैंक को एकजुट करने पर रहा, जो वर्तमान में पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है।

Why This Matters

बाबा बकाला का यह राजनीतिक जमावड़ा दर्शाता है कि 2027 के चुनाव पंजाब के लिए कितने निर्णायक होने वाले हैं। जहाँ एक ओर सत्ताधारी AAP अपने कल्याणकारी मॉडल पर भरोसा कर रही है, वहीं कांग्रेस आंतरिक कलह से जूझ रही है और भाजपा अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।

Did You Know?: बाबा बकाला वह स्थान है जहाँ गुरु तेघ बहादुर जी के नौवें गुरु होने का रहस्य प्रकट हुआ था, जो इसे सिखों के लिए अत्यंत पवित्र बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. बाबा बकाला का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह एक प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल है, जहाँ होने वाले राजनीतिक आयोजन पंजाब के जनमत को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

2. 2027 के चुनावों के लिए मुख्य मुद्दे क्या हैं?
मुख्य मुद्दों में कृषि कल्याण, धार्मिक संवेदनशीलता, नशा मुक्ति और प्रशासनिक भ्रष्टाचार शामिल हैं।