बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उप-वर्गीकरण को लेकर मतभेद गहरा गए हैं। हम (HAM-S) नेता संतोष कुमार सुमन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कोटे की समीक्षा की मांग की है, वहीं लोजपा (आर) के प्रमुख चिराग पासवान ने सामाजिक भेदभाव का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया है।
- HAM(S) नेता संतोष कुमार सुमन ने सबसे पिछड़े वर्गों, जैसे मुसहर समुदाय, तक लाभ पहुंचाने के लिए एससी/एसटी उप-वर्गीकरण की वकालत की।
- लोजपा (आर) प्रमुख चिराग पासवान ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक छुआछूत है।
- भाजपा इस संवेदनशील मुद्दे पर संभलकर चल रही है और उसने सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर आरक्षण के मुद्दे पर घमासान मच गया है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के दो प्रमुख सहयोगी दलों—हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)—के बीच अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उप-वर्गीकरण को लेकर वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। इस विवाद की शुरुआत बिहार के लघु जल संसाधन मंत्री और HAM(S) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और उप-वर्गीकरण का समर्थन किया।
संतोष कुमार सुमन, जो केंद्रीय मंत्री और HAM(S) के संस्थापक जीतन राम मांझी के बड़े बेटे हैं, ने तर्क दिया कि आरक्षण की समीक्षा करने का मतलब इसे समाप्त करना नहीं है। बल्कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ उन सबसे कमजोर और हाशिए पर पड़े समुदायों तक पहुंचे जो ऐतिहासिक रूप से पीछे छूट गए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त 2024 के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया, जिसमें राज्यों को एससी/एसटी श्रेणियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने की अनुमति दी गई थी ताकि अधिक पिछड़े उप-समूहों को विशेष कोटा मिल सके।
चिराग पासवान का तीखा पलटवार
दूसरी ओर, एनडीए के एक अन्य महत्वपूर्ण सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस उप-वर्गीकरण का कड़ा विरोध किया है। लोजपा (आर) के प्रमुख चिराग पासवान का मानना है कि एससी/एसटी को आरक्षण सामाजिक छुआछूत और ऐतिहासिक भेदभाव के आधार पर दिया गया था, न कि आर्थिक मानदंडों पर। चिराग ने तर्क दिया कि जब तक समाज में जातिगत भेदभाव मौजूद है, तब तक उप-वर्गीकरण का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हाल ही में उत्तराखंड में हुए कथित भेदभाव का भी उदाहरण दिया।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल एक वैचारिक मतभेद नहीं है, बल्कि बिहार के अत्यंत खंडित दलित वोट बैंक पर नियंत्रण स्थापित करने की एक गहरी राजनीतिक जंग है। बिहार में दलितों के बीच पासवान (5.2%), रविदास (5.3%) और मुसहर (4%) सबसे बड़े समूह हैं। जीतन राम मांझी का परिवार मुसहर समुदाय से आता है, जो महादलितों में सबसे पिछड़ा माना जाता है, जबकि चिराग पासवान का आधार मुख्य रूप से पासवान समुदाय है। ऐसे में उप-वर्गीकरण की मांग सीधे तौर पर राजनीतिक प्रभुत्व की लड़ाई से जुड़ी है।
"एससी/एसटी उप-वर्गीकरण पर यह बहस केवल कानूनी व्याख्याओं तक सीमित नहीं है; यह बिहार के आगामी चुनावों से पहले दलित नेतृत्व और वोट बैंक के ध्रुवीकरण की एक सोची-समझी राजनीतिक बिसात है।" - राजनीतिक विश्लेषक
HAM(S) के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने इस मुद्दे पर पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि दलितों के भीतर आरक्षण का लाभ केवल कुछ अग्रणी समूहों तक ही सीमित रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुसहर समुदाय से आज तक कोई आईएएस अधिकारी क्यों नहीं बना? पार्टी ने 2008 में नीतीश कुमार द्वारा बनाए गए 'महादलित' ढांचे में भी विसंगतियों की बात कही है और मांग की है कि एक राज्य-स्तरीय अध्ययन कराकर प्रत्येक उप-जाति के प्रतिनिधित्व का मूल्यांकन किया जाए।
दोनों दलों की राजनीतिक ताकत और रुख की तुलना
| विशेषता / पार्टी | हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM-S) | लोक जनशक्ति पार्टी (LJP-RV) |
|---|---|---|
| मुख्य नेता | संतोष कुमार सुमन / जीतन राम मांझी | चिराग पासवान |
| उप-कोटा पर रुख | पूर्ण समर्थन (मुसहर जैसे अति-पिछड़ों को लाभ मिले) | कड़ा विरोध (दलित एकता खंडित होने का डर) |
| बिहार में ताकत | 5 विधायक, 1 सांसद | 19 विधायक, 5 सांसद |
| मुख्य सामाजिक आधार | मुसहर और भुइयां समुदाय (लगभग 4% आबादी) | पासवान समुदाय (लगभग 5.2% आबादी) |
इस पूरे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि पार्टी सामाजिक न्याय और आरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सामाजिक भेदभाव रहेगा, आरक्षण जारी रहेगा और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई भी कदम उठाने से पहले अनुभवजन्य आंकड़ों (empirical data) का अध्ययन किया जाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: एससी/एसटी उप-वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला था?
उत्तर 1: 1 अगस्त 2024 को, सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला सुनाया कि राज्यों को अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) को उप-वर्गीकृत करने का अधिकार है ताकि सबसे पिछड़े उप-जातियों को लक्षित आरक्षण लाभ मिल सके।
प्रश्न 2: चिराग पासवान एससी/एसटी के उप-वर्गीकरण का विरोध क्यों कर रहे हैं?
उत्तर 2: चिराग पासवान का मानना है कि आरक्षण सामाजिक छुआछूत और भेदभाव के आधार पर दिया गया था, न कि आर्थिक स्थिति पर। उनका तर्क है कि उप-वर्गीकरण से दलितों की सामूहिक सामाजिक और राजनीतिक ताकत कमजोर होगी।