बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने आरएसएस के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे और कांग्रेस नेता मोहम्मद नलापड को जमानत दे दी है। दोनों ने आरोपों को खारिज करते हुए मुकदमे की मांग की है।
- बेंगलुरु की 42वीं विशेष अदालत ने प्रियंक खरगे और मोहम्मद नलापड को जमानत दी।
- आरोपियों को 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और 10,000 रुपये की नकद सुरक्षा जमा करनी होगी।
- मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को शिकायतकर्ता के साक्ष्य के लिए निर्धारित है।
- आरोप आरएसएस के खिलाफ अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों से संबंधित हैं।
बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने शनिवार को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे और कांग्रेस नेता मोहम्मद नलापड को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ मानहानि के मामले में जमानत दे दी है। 42वीं विशेष अदालत (निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए) ने दोनों आरोपियों को व्यक्तिगत बॉन्ड और नकद सुरक्षा के साथ राहत प्रदान की है।
कानूनी कार्यवाही के दौरान, बचाव पक्ष के वकीलों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की विभिन्न धाराओं के तहत जमानत याचिका दायर की। अदालत ने पाया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत लगाए गए आरोप जमानती प्रकृति के हैं, जिसके आधार पर अदालत ने उनकी याचिकाओं को स्वीकार कर लिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सिद्धपुरा के एक आरएसएस कार्यकर्ता, ए तेजस ने एक निजी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रियंक खरगे ने 14 अक्टूबर, 2025 को एक ट्वीट के माध्यम से आरएसएस के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। वहीं, मोहम्मद नलापड पर एक यूट्यूब चैनल के माध्यम से संगठन के बारे में आपत्तिजनक बयान देने का आरोप है।
खरगे के ट्वीट में उन्होंने आरएसएस की गतिविधियों पर सवाल उठाने के बाद मिले धमकियों का जिक्र किया था। उन्होंने लिखा था, "जब आरएसएस ने महात्मा गांधी या बाबासाहेब अंबेडकर को नहीं छोड़ा, तो वे मुझे क्यों छोड़ेंगे?" उन्होंने समाज को 'बुद्ध, बसवन्ना और बाबासाहेब' के सिद्धांतों पर आधारित बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
BozokMedia विश्लेषण: राजनीतिक निहितार्थ
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी दर्शाता है। एक उच्च पदस्थ मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्यवाही और उसके बाद जमानत मिलना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक/सामाजिक संगठनों की प्रतिष्ठा के बीच के संघर्ष को रेखांकित करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राजनीतिक बयानों की सीमा और मानहानि कानूनों के अनुप्रयोग पर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
दोनों आरोपियों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने अब मामले को 19 सितंबर के लिए स्थगित कर दिया है, जब शिकायतकर्ता के साक्ष्य दर्ज किए जाएंगे।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: प्रियंक खरगे को किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था?
उत्तर: यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत मानहानि से संबंधित है।
प्रश्न 2: अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को शिकायतकर्ता के साक्ष्य के लिए तय की है।