डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह सैन्य सेवा में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने वाली नीति का समर्थन करे। यह मामला अमेरिकी सैन्य संरचना और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच एक बड़े कानूनी संघर्ष को दर्शाता है।
- ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सैन्य सेवा में ट्रांसजेंडर प्रतिबंध को बहाल करने की मांग की है।
- यह मामला वाशिंगटन के एक संघीय अदालत के उस फैसले को चुनौती देता है जिसने ट्रांसजेंडर सैनिकों के पक्ष में निर्णय दिया था।
- वर्तमान में लगभग 4,240 सैन्य कर्मियों के पास जेंडर डिस्फोरिया का निदान है।
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने एक बार फिर ट्रांसजेंडर अधिकारों के मुद्दे पर कानूनी मोर्चा खोल दिया है। प्रशासन ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह उस नीति को कानूनी मान्यता दे जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अमेरिकी सशस्त्र बलों में सेवा देने से रोकती है। यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कार्यभार संभालने के तुरंत बाद उठाया गया है, जिन्होंने सैन्य सेवा में ट्रांसजेंडर उपस्थिति को 'असंगत' करार देते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे।
कानूनी संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब गहरा गया जब वाशिंगटन के एक संघीय अदालत ने उन ट्रांसजेंडर सैनिकों के पक्ष में फैसला सुनाया जो पहले से ही सेना में कार्यरत थे। प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील कर रहा है। प्रशासन की ओर से पेश हुए उप अटॉर्नी जनरल डी. जॉन सॉयर ने तर्क दिया कि सशस्त्र बलों के पास यह तय करने का विशेष अधिकार है कि कौन देश की सेवा कर सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल सैन्य नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी न्यायपालिका के वैचारिक झुकाव और नागरिक अधिकारों के भविष्य को भी प्रभावित करेगा। यदि सुप्रीम कोर्ट इस नीति को बरकरार रखता है, तो यह ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक बड़ा झटका होगा और दशकों से चले आ रहे अधिकारों के संघर्ष को पीछे धकेल सकता है।
प्रशासन का तर्क है कि सैन्य दक्षता बनाए रखने के लिए सेवा की शर्तों को निर्धारित करना राष्ट्रपति का विशेषाधिकार है।
रक्षा अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 4,240 सदस्य सक्रिय ड्यूटी, रिजर्व या नेशनल गार्ड में ऐसे हैं जिन्हें 'जेंडर डिस्फोरिया' (लिंग संबंधी पहचान में मनोवैज्ञानिक संकट) का निदान किया गया है। यह नीति उन सभी को प्रभावित कर सकती है।
ऐतिहासिक संदर्भ और न्यायिक रुख
सुप्रीम कोर्ट का वर्तमान रूढ़िवादी बहुमत पहले भी ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। पिछले कुछ वर्षों में, कोर्ट ने खेल श्रेणियों और अल्पसंख्यकों के लिए हार्मोन थेरेपी जैसे मुद्दों पर कई ऐसे फैसले दिए हैं जो ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं।
ट्रंप ने अपने 2024 के चुनावी अभियान के दौरान भी ट्रांसजेंडर विरोधी रुख अपनाया था। इससे पहले उनके पहले कार्यकाल में भी ऐसी ही नीति लागू थी, जिसे राष्ट्रपति जो बाइडन ने 2021 में निरस्त कर दिया था।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह नीति केवल नए भर्ती होने वाले सैनिकों पर लागू होगी?
नहीं, प्रशासन उन सैनिकों को भी हटाने की कोशिश कर रहा है जो पहले से ही सेवा में हैं।
प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट का फैसला कब तक आ सकता है?
संभावना है कि कोर्ट इस साल के अंत तक मामले को स्वीकार करने का निर्णय ले और फैसला अगले साल के मध्य तक आए।