मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) के निर्माण में भारी वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को घेरा है। सीएम ने दावा किया कि 200 करोड़ का प्रोजेक्ट 864 करोड़ तक पहुँच गया, फिर भी अधूरा है।
- JPNIC प्रोजेक्ट की लागत 200 करोड़ से बढ़कर 864 करोड़ रुपये हुई, लेकिन निर्माण अधूरा है।
- सीएम योगी ने सपा नेताओं पर इस परियोजना को 'प्राइवेट लिमिटेड' की तरह चलाने का आरोप लगाया।
- सरकार ने JPNIC को 30 साल की लीज पर देने का निर्णय लिया है, जिसका सपा विरोध कर रहा है।
- PAC में तीन नई महिला बटालियन का गठन और 50 हजार बेटियों को स्कूटी देने की घोषणा।
लखनऊ में वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। सीएम योगी ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) के निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए इसे सरकारी खजाने पर 'डकैती' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस परियोजना का अनुमानित बजट लगभग 200 करोड़ रुपये था, उस पर 864 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद इमारत आज भी अधूरी है।
मुख्यमंत्री ने एक कदम आगे बढ़ते हुए दावा किया कि अखिलेश यादव, डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव के नाम वाली एक विशेष कमेटी के माध्यम से इस केंद्र पर सपा का कब्जा बनाए रखने की कोशिश की गई थी। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, इस सरकारी संपत्ति को एक 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' की तरह चलाने की साजिश रची गई थी ताकि इससे होने वाली कमाई का उपयोग निजी लाभ के लिए किया जा सके।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this clash is not just about a building, but a strategic narrative battle ahead of future political alignments in Uttar Pradesh. By highlighting the cost escalation from 200cr to 864cr, the current administration is attempting to frame the previous regime as fiscally irresponsible and corrupt, while the opposition is using the 'lease' decision to paint the current government as one that sells off public assets.
"The JPNIC controversy represents a classic political tug-of-war where infrastructure projects become symbols of administrative failure or success for opposing parties."
इस विवाद की पृष्ठभूमि तब और गहरी हो गई जब राज्य कैबिनेट ने JPNIC को 30 साल की लीज पर देने का फैसला किया। इस फैसले के बाद अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा सरकार सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंप रही है। उन्होंने छतर मंजिल का उदाहरण देते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
राजनीतिक हमलों के बीच, सीएम योगी ने शासन और सुरक्षा व्यवस्था में सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार द्वारा खत्म की गई PAC की 54 कंपनियों को पुनर्गठित किया गया है। साथ ही, महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाते हुए वीरांगना ऊदा देवी पासी, झलकारीबाई कोरी और वीरांगना अवंतीबाई लोधी के नाम पर तीन महिला बटालियन बनाई गई हैं।
| मुद्दा | बीजेपी सरकार का पक्ष (योगी) | सपा का पक्ष (अखिलेश) |
|---|---|---|
| JPNIC खर्च | 200 करोड़ का काम 864 करोड़ में अधूरा रहा | सरकार संपत्तियों को बेच रही है |
| प्रबंधन | इसे प्राइवेट लिमिटेड बनाने की साजिश थी | लीज पर देना सरकारी संपत्ति का नुकसान है |
| PAC सुधार | महिला बटालियन और पुनर्गठन | (कोई विशिष्ट टिप्पणी नहीं) |
Frequently Asked Questions
1. JPNIC विवाद का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य विवाद इसके निर्माण की लागत में भारी वृद्धि (200 करोड़ से 864 करोड़) और सरकार द्वारा इसे 30 साल की लीज पर देने के फैसले को लेकर है।
2. सीएम योगी ने महिला सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए?
सीएम योगी ने PAC में तीन नई महिला बटालियन का गठन किया है और 50 हजार स्नातक बेटियों को स्कूटी देने की घोषणा की है।