कन्नूर में सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले नॉर्थ मालाबार एजुकेशनल सोसाइटी पर करोड़ों के फंड के दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप लगे हैं। निवेशकों ने एक दशक बाद भी कॉलेज निर्माण न होने पर जवाबदेही मांगी है।

  • नॉर्थ मालाबार एजुकेशनल सोसाइटी पर फंड के दुरुपयोग का आरोप।
  • निवेशकों ने 10 साल बाद भी कॉलेज न बनने पर सवाल उठाए।
  • समाज का दावा है कि ₹28 लाख के बदले ₹1.5-2 करोड़ की जमीन खरीदी गई है।
  • विपक्ष और निवेशकों ने भूमि स्वामित्व के दस्तावेजों की मांग की है।

केरल के कन्नूर जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले नॉर्थ मालाबार एजुकेशनल सोसाइटी पर वित्तीय अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप लगे हैं। यह समाज इरीट्टी में एक स्व-वित्तपोषित कॉलेज स्थापित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन लगभग एक दशक बीत जाने के बाद भी परियोजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।

विवाद की जड़: कहाँ गया पैसा?

वर्ष 2015 में गठित इस सोसाइटी ने पहाड़ी क्षेत्रों के छात्रों को सस्ती शिक्षा प्रदान करने के वादे के साथ जनता से अंशदान (shares) जुटाए थे। निवेशकों का आरोप है कि उनसे बड़ी राशि जुटाई गई, लेकिन कॉलेज का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ। स्थानीय सीपीआई(एम) नेता और शेयरधारक जोसेफ थॉमस ने मांग की है कि सोसाइटी को भूमि के स्वामित्व के दस्तावेज (title deeds) और धन संग्रह की रसीदें सार्वजनिक करनी चाहिए।

विवाद तब और गहरा गया जब यह सवाल उठा कि क्या सोसाइटी ने वास्तव में भूमि खरीदी है या केवल 2017 में एक प्रतीकात्मक आधारशिला समारोह आयोजित किया था। थॉमस ने पूछा, "क्या लोगों को शिक्षा के लिए निवेश करने को कहा गया था या उन्हें रियल एस्टेट व्यवसाय के लिए पैसा देने को कहा गया था?"

समाज का पक्ष और बचाव

सोसाइटी के अध्यक्ष और कन्नूर जिला पंचायत अध्यक्ष बिनॉय कुरियन ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटबंदी, केरल की बाढ़ और कोविड-19 महामारी जैसी आपदाओं के कारण धन जुटाने की प्रक्रिया बाधित हुई। कुरियन के अनुसार, सोसाइटी ने 328 शेयरधारकों से ₹28 लाख एकत्र किए और इरीट्टी के पास लगभग 38 सेंट भूमि खरीदी है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत ₹1.5 करोड़ से ₹2 करोड़ के बीच है।

विशेषज्ञ विश्लेषण के अनुसार, सामुदायिक संस्थाओं में पारदर्शिता की कमी न केवल व्यक्तिगत निवेशकों को प्रभावित करती है, बल्कि भविष्य के सामाजिक आंदोलनों के प्रति जनता के विश्वास को भी कम करती है।

BozokMedia विश्लेषण: राजनीतिक प्रभाव और जवाबदेही

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वित्तीय हेरफेर का नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक विश्वसनीयता का भी प्रश्न है। चूंकि इस परियोजना को आरएसएस से जुड़े संस्थानों के विकल्प के रूप में पेश किया गया था, इसलिए इसकी विफलता पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। यदि भूमि का स्वामित्व और वित्तीय विवरण स्पष्ट नहीं किए जाते हैं, तो यह स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर असंतोष को और बढ़ा सकता है।

क्या आप जानते हैं?: केरल के पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा के अवसरों की कमी के कारण सामुदायिक निवेश आधारित मॉडल काफी लोकप्रिय रहे हैं, लेकिन पारदर्शिता के अभाव में ये अक्सर विवादों में घिर जाते हैं।

Frequently Asked Questions

1. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण यह है कि निवेशकों ने कॉलेज के लिए पैसा दिया, लेकिन 10 साल बाद भी कॉलेज नहीं बना, जिससे फंड के दुरुपयोग का संदेह पैदा हो गया है।

2. सोसाइटी का क्या स्पष्टीकरण है?
सोसाइटी का कहना है कि महामारी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण देरी हुई और उनके पास अब पर्याप्त मूल्य की भूमि मौजूद है।