मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की चेतावनी के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय के हॉस्टल की दीवारों से विवादित नारे और पोस्टर मिटा दिए गए हैं। इस कार्रवाई ने विश्वविद्यालय के भीतर वामपंथी और दक्षिणपंथी राजनीति के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
- मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विश्वविद्यालय परिसर में 'राष्ट्रविरोधी' तत्वों को हटाने की चेतावनी दी थी।
- जादवपुर विश्वविद्यालय के आर्ट्स हॉस्टल से फिलिस्तीन और माओवादी नेता किशनजी के समर्थन में लिखे नारे मिटा दिए गए।
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे नियमित सफाई प्रक्रिया बताया है, जबकि छात्र संगठनों ने इसकी आलोचना की है।
कोलकाता के प्रतिष्ठित जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University) में राजनीतिक तनाव चरम पर है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा परिसर के भीतर से 'राष्ट्रविरोधी' तत्वों को उखाड़ फेंकने की कड़ी चेतावनी जारी करने के बाद, विश्वविद्यालय की दीवारों पर लिखे गए विभिन्न राजनीतिक भित्तिचित्रों (Graffiti) को सफेद पेंट से ढंक दिया गया है।
यह कार्रवाई मुख्य रूप से JU आर्ट्स हॉस्टल की दीवारों पर की गई, जहाँ से फिलिस्तीन के समर्थन में लिखे नारे और माओवादी नेता किशनजी के समर्थन में लिखे गए संदेशों को मिटाया गया है। इतना ही नहीं, ओपन-एयर थिएटर पर लिखे एक विवादास्पद नारे, जिसमें लोकतंत्र के खिलाफ हिंसा की बात कही गई थी, और अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्ता ऑड्रे लॉर्डे के चित्र को भी सफेद रंग से मिटा दिया गया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जादवपुर विश्वविद्यालय दशकों से अपनी स्वतंत्र राजनीतिक संस्कृति और पोस्टर/भित्तिचित्रों के लिए जाना जाता रहा है। दीवारों पर लिखे ये नारे केवल कला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की राजनीतिक पहचान का हिस्सा रहे हैं। मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप इस पारंपरिक संस्कृति और राज्य सरकार के सख्त रुख के बीच एक बड़े टकराव का संकेत देता है।
विश्वविद्यालय परिसर स्वतंत्र विचारों के केंद्र होते हैं, लेकिन जब वे राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न पर खड़े होते हैं, तो संघर्ष अपरिहार्य हो जाता है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक सार्वजनिक सभा में विश्वविद्यालय के संदेशों पर निशाना साधते हुए कहा, "आप किस तरह की आजादी चाहते हैं? 'कश्मीर मांगे आजादी' जैसे नारे यहाँ नहीं चलेंगे। छात्रों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की वापसी के लिए नारे लगाने चाहिए।"
इस घटनाक्रम के बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने विवादों से बचने के लिए इसे 'नियमित सफाई' का नाम दिया है। हालांकि, CPI(M) नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि परिसर युवाओं को स्वतंत्र रूप से सोचने के लिए प्रोत्साहित करने चाहिए, जिसे पेंट से नहीं रोका जा सकता।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जादवपुर विश्वविद्यालय लंबे समय से वामपंथी और दक्षिणपंथी राजनीति का केंद्र रहा है। हाल ही में 19 अगस्त को ABVP समर्थकों और छात्र संगठनों के बीच हुई झड़पों ने परिसर के माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: जादवपुर विश्वविद्यालय में दीवारों को क्यों पेंट किया गया?
उत्तर: आधिकारिक तौर पर इसे नियमित सफाई बताया गया है, लेकिन यह मुख्यमंत्री की 'राष्ट्रविरोधी' नारे हटाने की चेतावनी के बाद हुआ है।
प्रश्न 2: क्या इस कार्रवाई का छात्रों ने विरोध किया है?
उत्तर: कुछ वामपंथी छात्र संगठनों ने इसका विरोध किया है, लेकिन अभी तक कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ है।