कन्नूर के पूर्व डीवाईएफआई नेता मनु थॉमस ने सीपीआई(एम) के भीतर कथित चाटुकारिता और पिनाराई विजयन के प्रभुत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर 'सांस्कृतिक और मानसिक आधिपत्य' का आरोप लगाया है।

  • पूर्व डीवाईएफआई जिला सचिव मनु थॉमस ने सीपीआई(एम) में 'पिनाराई पंथ' का आरोप लगाया।
  • पार्टी के भीतर चाटुकारिता और डर की संस्कृति को बढ़ावा देने का दावा।
  • पिनाराई विजयन के नेतृत्व शैली की तुलना स्टालिन के दौर से की गई।

केरल के कन्नूर जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI), जो कि सीपीआई(एम) की युवा इकाई है, के पूर्व जिला सचिव मनु थॉमस ने पार्टी के भीतर व्याप्त कथित 'जी-हुजूरी' की संस्कृति पर तीखा हमला बोला है। थॉमस ने आरोप लगाया कि पार्टी के जिला स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक, केवल पिनाराई विजयन की प्रशंसा या उनके डर का माहौल है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पिनाराई विजयन हाल के विधानसभा चुनावों में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की करारी हार के बाद कन्नूर में राजनीतिक बैठकों में शामिल हो रहे हैं। थॉमस, जिन्हें 2024 में सदस्यता नवीनीकरण न करने के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 2005 के बाद से पार्टी की समितियों में एक ऐसा माहौल बन गया है जहाँ सवाल पूछने की हिम्मत किसी में नहीं बची है।

सांस्कृतिक और मानसिक आधिपत्य

मनु थॉमस ने अपने फेसबुक पोस्ट में इतालवी मार्क्सवादी विचारक एंटोनियो ग्राम्शी का उल्लेख करते हुए इसे 'सांस्कृतिक और मानसिक आधिपत्य' (Cultural and Mental Hegemony) करार दिया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर कई ऐसे 'जूनियर पिनाराई' पैदा हो गए हैं जो उनके अधिनायकवादी तरीकों की नकल कर रहे हैं। उनके अनुसार, पार्टी के सदस्य इतने डरे हुए हैं कि विजयन के न रहने पर भी वे उनके आने के खौफ से जागेंगे।

BozokMedia analysis shows that this internal rift highlights a growing tension between the traditional democratic centralism of the CPI(M) and the perceived personalization of power. When former cadres begin comparing current leadership to Stalinist regimes, it indicates a deep-seated ideological crisis within the party's grassroots in its stronghold of Kannur.

"The emergence of public dissent from former high-ranking district functionaries suggests that the internal discipline of the CPI(M) may be masking systemic discontent."

थॉमस ने अपनी आलोचना को और आगे बढ़ाते हुए सोवियत संघ के पूर्व शासक स्टालिन और क्रांतिकारी ट्रॉट्स्की का उदाहरण दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि स्टालिन को केवल प्रशंसा चाहिए थी और उनके विरोधियों का अंत खामोशी से कर दिया गया। उन्होंने पार्टी के वफादारों को सलाह दी कि वे अब केवल नेतृत्व के स्पष्टीकरणों को सुनते रहें।

क्या आप जानते हैं?: कन्नूर जिला केरल में सीपीआई(एम) का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन यह क्षेत्र दशकों से भीषण राजनीतिक हिंसा का केंद्र भी रहा है।

1. मनु थॉमस कौन हैं और उन्हें पार्टी से क्यों निकाला गया?
मनु थॉमस कन्नूर में डीवाईएफआई के पूर्व जिला सचिव थे। उन्हें 2024 में अपनी पार्टी सदस्यता का नवीनीकरण न करने के कारण निष्कासित किया गया था।

2. 'पिनाराई पंथ' से मनु थॉमस का क्या तात्पर्य है?
उनका तात्पर्य पार्टी के भीतर पिनाराई विजयन के प्रति अंधभक्ति और उनके डर से पैदा हुई एक ऐसी संस्कृति से है जहाँ कोई भी उनके फैसलों पर सवाल नहीं उठाता।