केरल विधानसभा में डिप्टी विपक्ष नेता (Deputy LoP) के पद को लेकर वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के दो प्रमुख सहयोगियों, CPI और CPI(M) के बीच खींचतान तेज हो गई है। CPI ने 'सामूहिक नेतृत्व' का हवाला देते हुए इस पद की मांग की है, जिसे IUML का अप्रत्याशित समर्थन मिला है।
- केरल विधानसभा में डिप्टी विपक्ष नेता (Deputy LoP) के पद के लिए CPI और CPI(M) के बीच संघर्ष।
- CPI का तर्क है कि चुनाव में हार के बाद LDF को 'सामूहिक नेतृत्व' की आवश्यकता है।
- CPI(M) परंपरा का हवाला देते हुए पद पर अपना दावा ठोक रही है।
- IUML ने अप्रत्याशित रूप से CPI की मांग का समर्थन किया है।
केरल की राजनीति में एक नया मोड़ आया है। पिछले एक दशक तक वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के शासन के दौरान CPI(M) के साथ सहयोगी की भूमिका निभाने वाली CPI ने अब विपक्ष में अपनी भूमिका को बड़ा करने की मांग की है। CPI ने विधानसभा में डिप्टी विपक्ष नेता (Deputy LoP) के पद की मांग की है, जिससे गठबंधन के भीतर दरार दिखने लगी है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मई 2026 के विधानसभा चुनावों में LDF को भारी नुकसान हुआ और वह 140 सदस्यीय सदन में केवल 35 सीटों तक सिमट गया। CPI का तर्क है कि इस चुनावी विफलता के बाद वामपंथी खेमे को पुनर्गठित करने के लिए 'सामूहिक नेतृत्व' की आवश्यकता है। वहीं, CPI(M) ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक पद का विवाद नहीं है, बल्कि यह केरल के वामपंथी गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन का संघर्ष है। CPI लंबे समय से Pinarayi Vijayan के दबदबे और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनी उपेक्षा से असंतुष्ट रही है।
केरल की राजनीति में यह संघर्ष केवल एक पद के लिए नहीं, बल्कि वामपंथी गठबंधन के भीतर शक्ति के पुनर्वितरण के लिए है।
CPI(M) के नेता C N Mohanan ने इस मांग को परंपरा के विरुद्ध बताया है। उनका कहना है कि 1980 में LDF के गठन के बाद से हमेशा यह पद CPI(M) के पास ही रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि CPI की ये नई मांगें वामपंथी एकता को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
दूसरी ओर, CPI के वरिष्ठ नेता C Divakaran ने स्पष्ट किया कि CPI(M) अकेले यह तय नहीं कर सकती कि यह पद किसे मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि Pinarayi Vijayan का निर्णय अंतिम नहीं हो सकता और गठबंधन के सभी साथियों के बीच चर्चा होनी चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1980 में LDF के गठन के समय से ही CPI(M) और CPI इसके मुख्य स्तंभ रहे हैं। पारंपरिक रूप से, जब भी गठबंधन विपक्ष में होता है, नेता प्रतिपक्ष और डिप्टी नेता प्रतिपक्ष दोनों पद CPI(M) के पास ही रहते हैं। हालांकि, वर्तमान में CPI(M) के पास 26 विधायक हैं, जबकि CPI के पास केवल 8 हैं, जो उनके दावे को चुनौतीपूर्ण बनाता है।
Frequently Asked Questions
1. CPI ने डिप्टी LoP पद की मांग क्यों की है?
CPI का कहना है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद LDF को 'सामूहिक नेतृत्व' की जरूरत है ताकि गठबंधन फिर से मजबूत हो सके।
2. CPI(M) का इस पर क्या स्टैंड है?
CPI(M) का कहना है कि परंपरा के अनुसार यह पद हमेशा उन्हीं के पास रहा है और CPI की मांग एकता के लिए खतरा है।