आईटी मंत्री नारा लोकेश ने विशाखापट्टनम में पूर्व मुख्यमंत्री के. रोशैया की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया और उनके राजनीतिक मूल्यों के सम्मान में इसे 'स्टैच्यू ऑफ स्टेट्समैन' नाम देने का प्रस्ताव रखा।
- नारा लोकेश ने विशाखापट्टनम के सिरिपुरम सर्कल में पूर्व सीएम के. रोशैया की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया।
- रोशैया के नेतृत्व को मान्यता देते हुए प्रतिमा को 'स्टैच्यू ऑफ स्टेट्समैन' नाम देने का प्रस्ताव।
- रोशैया के जीवन पर समर्पित एक संग्रहालय और शैक्षिक सामग्री बनाने की योजना।
- इस आयोजन ने आर्य वैश्य समुदाय के प्रति गठबंधन सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर किया।
राजनीतिक विरासत को सम्मान देने के एक महत्वपूर्ण कदम में, आईटी मंत्री नारा लोकेश ने सोमवार को विशाखापट्टनम के सिरिपुरम सर्कल में अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कोनिजेती रोशैया की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। इस समारोह में सांसद एम. श्रीभरत और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री टी.जी. भरत गुप्ता सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस अवसर पर बोलते हुए, श्री लोकेश ने रोशैया को राजनीतिक मूल्यों और सत्यनिष्ठा का प्रतीक बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रोशैया का करियर अहंकार की कमी और जनता के हित में सरकार से सवाल पूछने की प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता था, चाहे वह सत्ता में हों या विपक्ष में।
'स्टैच्यू ऑफ स्टेट्समैन' की अवधारणा
अमरावती में पोट्टी श्रीरामुलु की प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ सैक्रिफाइस' के समान, नारा लोकेश ने इस नई प्रतिमा को 'स्टैच्यू ऑफ स्टेट्समैन' (राजनेता की प्रतिमा) नाम देने का प्रस्ताव रखा। यह पहल उनके 'युवा गालम पदयात्रा' के दौरान आर्य वैश्य समुदाय द्वारा उठाई गई मांगों के बाद की गई है, जिसमें समुदाय ने अपने सम्मान और योगदान को मान्यता देने की इच्छा व्यक्त की थी।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केवल एक स्मारक कार्य नहीं है, बल्कि प्रभावशाली आर्य वैश्य समुदाय के भीतर समर्थन मजबूत करने का एक रणनीतिक प्रयास है। पदयात्रा के दौरान किए गए वादों को इस प्रतिमा से जोड़कर, नारा लोकेश यह संकेत दे रहे हैं कि सरकार सामुदायिक पहचान और विरासत के प्रति सचेत है।
"के. रोशैया जैसे नेता का सम्मान करना प्रशासनिक स्थिरता के पुराने दौर और आंध्र प्रदेश के नए डिजिटल शासन के बीच एक सेतु का काम करता है।"
प्रतिमा के अलावा, श्री लोकेश ने रोशैया की विरासत को संरक्षित करने के लिए एक व्यापक योजना की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री की राजनीतिक यात्रा का विवरण देने वाले विशेष वीडियो और किताबें बनाने का सुझाव दिया। इसके अलावा, उन्होंने आर्य वैश्य बुजुर्गों से एक समर्पित संग्रहालय के लिए स्थान चिन्हित करने का आग्रह किया, जिसे 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
उद्योग और वाणिज्य मंत्री टी.जी. भरत गुप्ता ने रोशैया के साथ अपने संबंधों को याद किया और बताया कि कैसे रोशैया ने उनके पिता टी.जी. वेंकटेश को कैबिनेट में शामिल कर उन्हें प्रोत्साहित किया था। मंत्री भरत ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ट्रस्ट बोर्ड में आर्य वैश्य समुदाय के लिए प्रतिनिधित्व देने का भी अनुरोध किया।
1. के. रोशैया की प्रतिमा कहाँ स्थित है?
कांस्य प्रतिमा विशाखापट्टनम के सिरिपुरम सर्कल में स्थित है।
2. प्रतिमा के लिए प्रस्तावित नाम क्या है?
आईटी मंत्री नारा लोकेश ने इसे 'स्टैच्यू ऑफ स्टेट्समैन' नाम देने का प्रस्ताव दिया है।