राज्यसभा सदस्य पाका वेंकट सत्यनारायण ने विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNTs) के उत्थान के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने की पुरजोर वकालत की है।

  • सांसद पाका वेंकट सत्यनारायण ने DNTs, NTs और SNTs के लिए विशेष नीति की मांग की।
  • घुमंतू जनजातियां SC/ST और OBC समुदायों को मिलने वाले कल्याणकारी लाभों से वंचित हैं।
  • जीवन स्तर के व्यापक मूल्यांकन और लक्षित आजीविका योजनाओं की आवश्यकता।

विजयवाड़ा में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजाति दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, राज्यसभा सदस्य पाका वेंकट सत्यनारायण ने भारत की घुमंतू आबादी की व्यवस्थित उपेक्षा पर गंभीर चिंता जताई। सांस्कृतिक एकजुटता के प्रतीक के रूप में 'हरिदासु' की वेशभूषा धारण किए सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि भारतीय संविधान समानता की गारंटी देता है, लेकिन विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNTs, NTs, और SNTs) तक ये लाभ पूरी तरह से नहीं पहुंच पाए हैं।

श्री सत्यनारायण ने सामाजिक कल्याण के वितरण में एक स्पष्ट अंतर की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि जहां अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), पिछड़ा वर्ग (BC) और अल्पसंख्यक समुदायों ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण सुधार देखे हैं, वहीं घुमंतू जनजातियां काफी हद तक अदृश्य रही हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यह अभाव उनके जीवन स्तर के व्यापक और डेटा-आधारित मूल्यांकन की कमी का सीधा परिणाम है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि DNTs का हाशिए पर होना केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक गहरा समाजशास्त्रीय घाव है। दशकों से, ये समुदाय कानूनी और सामाजिक अनिश्चितता में रहे हैं, जिनके पास अक्सर भूमि शीर्षक या स्थायी पते नहीं होते, जिससे वे मानक सरकारी कल्याण पंजीकरण के लिए अपात्र हो जाते हैं। 'विशेष नीति' की मांग एक ऐसे ढांचे को बनाने का प्रयास है जो इन जनजातियों की अद्वितीय प्रवासी प्रकृति को मान्यता दे।

सांसद ने औपनिवेशिक काल के दौरान इन समुदायों पर थोपे गए ऐतिहासिक आघात पर प्रकाश डाला। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे ब्रिटिश प्रशासन ने 'क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट' लागू किया था, जिसने पूरी समुदायों को 'जन्म से अपराधी' घोषित कर दिया था। कलनिकालीन कलंक की यह विरासत आज भी इन जनजातियों का पीछा कर रही है, जिससे वे भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में अपने अपार योगदान के बावजूद आधुनिक समाज के हाशिए पर धकेल दिए गए हैं।

'जन्मजात अपराधी' की छवि से 'सशक्त नागरिक' बनने के सफर के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है; इसके लिए घुमंतू पहचान के प्रति प्रशासनिक दृष्टिकोण में पूर्ण बदलाव की आवश्यकता है।

यह स्वीकार करते हुए कि मोदी सरकार ने इन शिकायतों को दूर करने के लिए कदम उठाए हैं, श्री सत्यनारायण ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से केवल मामूली बदलावों से आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने विशेष रूप से इन जनजातियों की आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से एक 'विशेष कार्य योजना' बनाने की मांग की, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे भारत की विकास यात्रा में पीछे न छूटें।

क्या आप जानते हैं?: 'विमुक्त जनजाति' (Denotified Tribes) उन समुदायों को कहा जाता है जिन्हें ब्रिटिश राज के दौरान 'अपराधी जनजाति' के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद उन्हें इस सूची से मुक्त (Denotify) कर दिया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: DNTs, NTs और SNTs कौन हैं?
ये विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियां हैं—वे समुदाय जो पारंपरिक रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करते हैं और औपनिवेशिक शासन के दौरान ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रखे गए या अपराधी घोषित किए गए थे।

प्रश्न 2: उन्हें मौजूदा SC/ST योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है?
कई घुमंतू जनजातियों के पास स्थायी निवास दस्तावेज या विशिष्ट जाति प्रमाण पत्र नहीं होते हैं, जो मुख्यधारा की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आवश्यक हैं, इसीलिए एक विशेष नीति की आवश्यकता है।