किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में वैश्विक शक्तियां एक साथ आएंगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी एकपक्षवाद के बीच एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और ग्लोबल साउथ के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है।
- बिश्केक, किर्गिस्तान में एससीओ (SCO) की 25वीं वर्षगांठ पर शिखर सम्मेलन का आयोजन।
- चीन, रूस और भारत के नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा।
- अमेरिकी एकपक्षवाद के जवाब में 'बहुध्रुवीय विश्व' (Multipolar World) की अवधारणा को बढ़ावा देना।
- वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों पर मध्य पूर्व और यूक्रेन युद्ध के प्रभाव का विश्लेषण।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों के नेता किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में एक महत्वपूर्ण वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए एकत्रित हो रहे हैं। इस उच्च-स्तरीय बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शामिल होंगे। इसके साथ ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक रणनीतिक बनाती है, क्योंकि यह संगठन के अस्तित्व के 25 वर्ष पूरे होने का अवसर है।
यह दो दिवसीय शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के विनाशकारी परिणामों और रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबे खिंचाव से जूझ रही है। इन संघर्षों ने न केवल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अस्थिर किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी भारी उथल-पुथल मचाई है। इस पृष्ठभूमि में, एससीओ देशों का लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जो पश्चिमी देशों, विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रम्प की एकपक्षीय विदेश नीति पर निर्भर न हो।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि यह यूरेशियाई देशों द्वारा अपनी सुरक्षा, कनेक्टिविटी और व्यापार को पश्चिमी संस्थानों के बिना व्यवस्थित करने का एक सचेत प्रयास है। विशेष रूप से भारत और चीन के बीच सीमा विवादों में आई हालिया नरमी के बाद, मोदी और शी का एक ही कमरे में होना इस बात का संकेत है कि एशिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां अब टकराव के बजाय सहयोग की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं।
"एससीओ अब केवल एक सुरक्षा ब्लॉक नहीं रहा, बल्कि यह अमेरिका के नेतृत्व वाले एशिया-पैसिफिक गठबंधन के खिलाफ एक रणनीतिक संतुलन बनाने का मंच बन गया है।"
ऐतिहासिक रूप से, एससीओ की शुरुआत 1996 में 'शंघाई फाइव' के रूप में हुई थी, जिसका प्राथमिक उद्देश्य सोवियत संघ के पतन के बाद सीमा विवादों को सुलझाना था। समय के साथ, इसका विस्तार हुआ और 2017 में भारत और पाकिस्तान को इसमें शामिल किया गया। वर्तमान में, एससीओ सदस्य दुनिया की 43 प्रतिशत आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग 23 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
| विशेषता | शंघाई सहयोग संगठन (SCO) | ब्रिक्स (BRICS) |
|---|---|---|
| मूल उद्देश्य | क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा विवाद | आर्थिक सहयोग और विकास |
| सदस्यता विस्तार | यूरेशियाई केंद्रित (अब ईरान, बेलारूस शामिल) | वैश्विक दक्षिण (Global South) केंद्रित |
| मुख्य फोकस | सुरक्षा, आतंकवाद, कनेक्टिविटी | वित्तीय विकल्प, व्यापार, राजनीति |
चीन इस मंच का उपयोग खुद को एक ऐसे 'महान शक्ति' के रूप में पेश करने के लिए कर सकता है जो संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है, जिससे वह अमेरिका की आक्रामक छवि के विपरीत नजर आए। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि ये प्रयास ठोस प्रस्तावों के बजाय केवल बयानबाजी तक सीमित रह सकते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एससीओ शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और विकास को बढ़ावा देना और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करना है।
प्रश्न 2: क्या भारत और चीन के संबंधों में सुधार की उम्मीद है?
उत्तर: हालिया सीमा वार्ता और इस शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं की मुलाकात संबंधों में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।