तेलंगाना के सांसदों ने पिछले दो वर्षों में आवंटित MPLADS फंड का केवल 23.8% ही उपयोग किया है, जो 33% के राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कई दिग्गज सांसद फंड खर्च करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

  • तेलंगाना के 23 सांसदों ने ₹394.8 करोड़ के कुल आवंटन में से केवल ₹94 करोड़ खर्च किए।
  • राज्य की उपयोग दर (23.8%) राष्ट्रीय औसत (33%) से काफी नीचे है।
  • निज़ामाबाद सांसद अरविंद धर्मपुरी 56.18% उपयोग के साथ शीर्ष पर रहे, जबकि कई सांसदों का खर्च 10% से भी कम रहा।

तेलंगाना के विकास कार्यों पर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। 'एम्पावर्ड इंडियन' (Empowered Indian) नामक एक नागरिक-नेतृत्व वाली परियोजना की हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य के सांसदों ने सदस्य संसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत आवंटित धन का उपयोग करने में भारी लापरवाही बरती है। आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के 23 सांसदों को ₹394.8 करोड़ आवंटित किए गए थे, लेकिन वास्तव में केवल ₹94 करोड़ का ही उपयोग किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों द्वारा कुल 3,703 कार्यों की सिफारिश की गई थी, जिनमें से केवल 2,347 कार्य ही पूरे हो सके हैं। इसका मतलब है कि लगभग 63.4% कार्यों की पूर्णता दर है, जबकि 1,356 महत्वपूर्ण विकास कार्य अभी भी लंबित हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि केवल कागजों पर सिफारिशें करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की भारी कमी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि MPLADS फंड का कम उपयोग सीधे तौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी बुनियादी ढांचे के विकास को प्रभावित करता है। जब निर्वाचित प्रतिनिधि आवंटित धन का उपयोग नहीं करते हैं, तो स्थानीय समुदायों को सड़क, पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही की कमी को भी दर्शाता है।

"MPLADS फंड का कम उपयोग यह संकेत देता है कि या तो सांसदों के पास ठोस विकास योजना की कमी है या प्रशासनिक समन्वय में गंभीर खामियां हैं।"

व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो, अरविंद धर्मपुरी (निज़ामाबाद) ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। उनके बाद बालाराम नाइक, वड्डिराजु रविचंद्र और बंदी संजय कुमार का नाम आता है। इसके विपरीत, मलकाजगिरी सांसद ईटला राजेंदर को सबसे अधिक ₹32.74 करोड़ आवंटित किए गए थे, लेकिन उन्होंने केवल 10.60% फंड का उपयोग किया।

सबसे चिंताजनक स्थिति उन सांसदों की है जिनका खर्च नगण्य रहा। रेणुका चौधरी (2.08%), बी. पार्थसारथी रेड्डी (2.43%), और किशन रेड्डी (3.23%) जैसे दिग्गजों का उपयोग प्रतिशत बेहद कम है। वहीं, नए राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने ₹7.34 करोड़ के आवंटन के खिलाफ शून्य खर्च दर्ज किया है।

अंतर्राज्यीय तुलना में, तेलंगाना की स्थिति आंध्र प्रदेश (23%), केरल (21.2%) और महाराष्ट्र (20.2%) से तो बेहतर है, लेकिन तमिलनाडु (43.1%) और कर्नाटक (28.5%) जैसे राज्यों से काफी पीछे है। कुछ अग्रणी राज्य तो 95% तक उपयोग दर हासिल कर चुके हैं।

राज्यउपयोग दर (%)
तमिलनाडु43.1%
कर्नाटक28.5%
तेलंगाना23.8%
आंध्र प्रदेश23%
महाराष्ट्र20.2%
क्या आप जानते हैं?: MPLADS योजना सांसदों को उनके निर्वाचन क्षेत्र में छोटे स्तर के विकास कार्यों के लिए सीधे धन आवंटित करने की शक्ति देती है, ताकि स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

Frequently Asked Questions

1. MPLADS फंड क्या है?
यह एक योजना है जिसके तहत भारत के सांसदों को उनके निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए प्रति वर्ष एक निश्चित राशि आवंटित की जाती है।

2. तेलंगाना में सबसे कम फंड किसने खर्च किया?
रेणुका चौधरी (2.08%) और बी. पार्थसारथी रेड्डी (2.43%) जैसे सांसदों का खर्च सबसे कम रहा है।