चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के बावजूद, बीएलओ ऐप में तकनीकी खामियों के कारण बिना आधार वाले मतदाता फॉर्म-6 जमा करने में असमर्थ हैं, जिससे लाखों लोगों के मताधिकार छिनने का खतरा है।

  • चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार आधार अनिवार्य नहीं है, लेकिन BLO ऐप में 'E-sign' के लिए आधार-लिंक्ड ओटीपी जरूरी है।
  • झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले और दस्तावेज़ विहीन लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
  • कर्नाटक में ड्राफ्ट रोल से 1.07 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं, जिन्हें अब पुन: पंजीकरण कराना है।

बेंगलुरु में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया एक गंभीर तकनीकी संकट से जूझ रही है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, जो यह कहते हैं कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए फॉर्म-6 जमा करते समय आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है, जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ऐप में एक ऐसी तकनीकी बाधा है जो बिना आधार वाले नागरिकों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर रही है।

समस्या की जड़ ऐप का 'E-sign' विकल्प है। वर्तमान में, ऐप केवल उन्हीं आवेदनों को स्वीकार और डिजिटाइज़ कर पा रहा है जिनमें आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी (OTP) के माध्यम से सत्यापन किया गया हो। हालांकि फॉर्म-6 में 'विकल्प E' के तहत आधार न होने की घोषणा का प्रावधान है, लेकिन ऐप में इस विकल्प को सक्षम नहीं किया गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं है, बल्कि एक लोकतांत्रिक विफलता है। जब प्रशासन यह मान लेता है कि "हर किसी के पास आधार है", तो वह समाज के सबसे हाशिए पर रहने वाले वर्ग—जैसे बेघर लोग और अत्यंत गरीब—को अनदेखा कर देता है। यह डिजिटल डिवाइड सीधे तौर पर संवैधानिक मताधिकार के उल्लंघन का कारण बन सकता है।

"तकनीकी बाधाएं कभी भी कानूनी अधिकारों से ऊपर नहीं होनी चाहिए; यदि नियम आधार को वैकल्पिक मानते हैं, तो सॉफ्टवेयर को भी उसी के अनुरूप होना चाहिए।"

बीएलओ ने खुलासा किया कि वे भौतिक फॉर्म (Physical Forms) को भी डिजिटाइज़ नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि सत्यापन के लिए ओटीपी अनिवार्य है। यह स्थिति उन बेघर लोगों के लिए और भी कठिन हो गई है जिनके लिए आयोग ने विशेष प्रावधान किए हैं (जैसे रात में पते का सत्यापन करना)।

इसके अतिरिक्त, एक नया घोषणा पत्र (Declaration Form) भी बाधा बन गया है। इसमें आवेदकों को यह साबित करना होता है कि उनके माता-पिता या दादा-दादी 2002 की मतदाता सूची का हिस्सा थे। जिन आवेदकों के पास यह विवरण नहीं है, उनके फॉर्म खारिज किए जा रहे हैं।

कर्नाटक का उदाहरण इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है, जहाँ हालिया संशोधन के दौरान 1.07 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए थे। यदि बीएलओ ऐप में आधार की अनिवार्यता बनी रहती है, तो इन लाखों पात्र मतदाताओं का पुन: पंजीकरण असंभव हो जाएगा।

क्या आप जानते हैं?: चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, बेघर व्यक्तियों के लिए बीएलओ को रात के समय उनके बताए पते पर जाकर यह सत्यापित करना होता है कि आवेदक वास्तव में वहां सोता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या फॉर्म-6 भरने के लिए आधार कार्ड कानूनी रूप से अनिवार्य है?
नहीं, चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार आधार अनिवार्य नहीं है और फॉर्म में इसके लिए अलग विकल्प दिया गया है।

p>प्रश्न 2: बीएलओ ऐप में मुख्य समस्या क्या है?
ऐप का E-sign फीचर केवल आधार-लिंक्ड ओटीपी के माध्यम से काम करता है, जिससे बिना आधार वाले लोग आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।