पीएम मोदी, आरएसएस और चीन से संबंधित संवेदनशील सामग्री पर विवाद के बाद सोनिया गांधी और पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया के बीच प्रकाशन समझौता टूट गया है। लेखक की टीम ने 'सेंसरशिप' के डर से बदलावों को खारिज कर दिया।
- पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) ने सोनिया गांधी की किताब 'बिलॉन्गिंग' के कई अध्यायों में बदलाव की मांग की थी।
- विवादित विषयों में पीएम नरेंद्र मोदी का 12 साल का शासन, आरएसएस की भूमिका और गलवान घाटी में चीन के साथ तनाव शामिल थे।
- लेखक की टीम ने इन बदलावों को 'अति-संवेदनशील' बताते हुए समझौते को खत्म कर दिया।
सोनिया गांधी की आगामी संस्मरण पुस्तक, जिसका शीर्षक 'बिलॉन्गिंग' (Belonging) है, प्रकाशन जगत में विवाद का केंद्र बन गई है। खबरों के मुताबिक, पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) के वकीलों ने किताब के कई अध्यायों में बदलाव और कुछ हिस्सों को हटाने का सुझाव दिया था, जिसके बाद अंततः यह डील टूट गई।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया लगभग दो महीने तक चली। PRHI की कानूनी टीम ने उन हिस्सों पर आपत्ति जताई थी जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के शासनकाल, आरएसएस (RSS) की भूमिका, सांप्रदायिक दंगों और अल्पसंख्यकों की स्थिति का जिक्र था। इसके अलावा, भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में हुए संघर्ष जैसे समकालीन मुद्दों पर भी कटौती की मांग की गई थी।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल एक संविदात्मक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारतीय प्रकाशन उद्योग में राजनीतिक विमर्श के सिकुड़ते दायरे को दर्शाता है। चूंकि इस किताब का वैश्विक प्रकाशन अल्फ्रेड ए नॉपफ (पेंग्विन रैंडम हाउस का हिस्सा) द्वारा किया जाना है, इसलिए भारतीय संस्करण में कटौती करने से एक "सेंसरशिप गैप" पैदा हो जाता। इससे पाठक वैश्विक संस्करण की तुलना भारतीय संस्करण से कर सकते थे, जिससे यह स्पष्ट हो जाता कि भारत में किन तथ्यों को दबाया गया है।
जब उच्च-प्रोफाइल राजनीतिक संस्मरणों की बात आती है, तो कानूनी जोखिम से बचने की कोशिश अक्सर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ टकराती है।
सोनिया गांधी की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे उनके परिवार के मित्र और राजीव गांधी के पूर्व सहयोगी ने इन सुझावों का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि PRHI के वकील "अत्यधिक संवेदनशील" हो रहे हैं और इतने बदलावों के बाद किताब के दो अलग-अलग संस्करण तैयार हो जाएंगे, जो पाठकों के बीच भ्रम और विवाद पैदा करेगा।
एक आधिकारिक बयान में, PRHI ने किसी भी बाहरी दबाव से इनकार किया है। कंपनी ने कहा कि वे इस किताब को प्रकाशित करने के लिए बहुत उत्सुक थे, लेकिन अंततः एक विशेष मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई, जिसके कारण लेखक की टीम ने आगे न बढ़ने का निर्णय लिया। अब खबरें हैं कि हार्पर कॉलिन्स (HarperCollins) भारत में इस किताब के प्रकाशन के लिए बातचीत के अंतिम चरण में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: सोनिया गांधी ने पेंग्विन इंडिया के साथ काम करना क्यों बंद किया?
मुख्य कारण कानूनी टीम द्वारा संवेदनशील राजनीतिक सामग्री को हटाने का दबाव था, जिसे लेखक की टीम ने सेंसरशिप के रूप में देखा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हार्पर कॉलिन्स भारत में इस पुस्तक के प्रकाशन और वितरण के समझौते के करीब है।