लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली और महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट से करोड़ों नामों के हटने को 'वोट चोरी' करार दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया है।
- दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
- राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को 'वोट चोरी आयोग' और मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे 'कुर्सी बचाओ आयोग' कहा है।
- महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच 39 लाख नए वोटर्स जुड़ने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली और महाराष्ट्र में स्पेशल इलेक्शन रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से भारी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेरा है। राहुल गांधी ने इस पूरी प्रक्रिया को 'वोट चोरी' का नाम देते हुए आरोप लगाया कि इसका एकमात्र उद्देश्य किसी भी कीमत पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जीत दिलाना और देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करना है।
राहुल गांधी ने विशेष रूप से महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच अचानक 39 लाख नए वोटर सूची में जुड़ गए, जिसे उन्होंने उस समय भी संदिग्ध बताया था। अब, जब ड्राफ्ट लिस्ट से लाखों नाम हटाए जा रहे हैं, तो यह साफ है कि सत्ता पक्ष अपनी सुविधा के अनुसार वोटर लिस्ट में हेरफेर कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो सरकार 'वोट चोरी' से बनती है, उसे जनता की बातों और उनकी जरूरतों की कोई परवाह नहीं होती।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the integrity of the electoral roll is the bedrock of any democracy. When millions of voters are removed or added in short intervals, it creates a trust deficit between the citizens and the Election Commission. If these allegations of 'selective deletion' are proven, it could lead to widespread legal challenges and public unrest before the upcoming polls.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ बुलंद की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भाजपा का षड्यंत्र अब खुलकर सामने आ गया है। खड़गे का दावा है कि जहाँ भाजपा को फायदा होता है, वहाँ मतदाता जोड़े जाते हैं और जहाँ उन्हें खतरा महसूस होता है, वहाँ वोट काटे जाते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उसे 'भाजपा का कुर्सी बचाओ आयोग' करार दिया।
वोटर लिस्ट में इस तरह के बड़े बदलाव चुनावी नतीजों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं, जो निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों के खिलाफ है।
पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए खड़गे ने बताया कि वहाँ हटाए गए नामों में से 91% को अपील के बाद वापस जोड़ा गया। यह इस बात का प्रमाण है कि शुरू में नामों को गलत तरीके से हटाया गया था ताकि विपक्षी समर्थकों को मतदान से वंचित रखा जा सके।
| राज्य | हटाए गए मतदाताओं की संख्या (अनुमानित) | मुख्य विवाद/आरोप |
|---|---|---|
| दिल्ली | 47.56 लाख | SIR ड्राफ्ट रोल से नाम गायब |
| महाराष्ट्र | 2.07 करोड़ | 39 लाख नए वोटर्स का अचानक जुड़ना |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: राहुल गांधी ने 'वोट चोरी' शब्द का इस्तेमाल क्यों किया?
उत्तर: क्योंकि उनका आरोप है कि चुनाव आयोग जानबूझकर उन मतदाताओं के नाम हटा रहा है जो भाजपा के खिलाफ जा सकते हैं।
प्रश्न 2: दिल्ली और महाराष्ट्र में कितने वोटर्स के नाम कटे हैं?
उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में लगभग 47.56 लाख और महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ वोटर्स के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हैं।