आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एनडीए सहयोगियों पर केंद्र से बिहार के 75% आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए दबाव न बनाने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने बिहार सरकार पर पत्रकारों और युवाओं को झूठे मुकदमों में फंसाने का भी गंभीर आरोप लगाया है।

  • तेजस्वी यादव ने एनडीए नेताओं पर आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया।
  • बिहार में 65% आरक्षण (EWS मिलाकर 75%) को नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई।
  • बिहार पुलिस और सरकार पर पत्रकारों और छात्रों को झूठे मुकदमों में फंसाने का आरोप लगाया गया।

पटना में अपने आधिकारिक आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एनडीए सहयोगियों—जितन राम मांझी, चिराग पासवान, नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा—पर आरोप लगाया कि वे बिहार में आरक्षण सीमा बढ़ाने के प्रति गंभीर नहीं हैं और केवल भाजपा एवं आरएसएस की विचारधारा को मजबूत कर रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि महागठबंधन सरकार के दौरान किए गए जाति सर्वेक्षण के बाद, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, दलित और आदिवासियों के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 65% किया गया था। यदि इसमें 10% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का कोटा भी जोड़ दिया जाए, तो कुल आरक्षण 75% हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र को मनाया जाना चाहिए था, लेकिन एनडीए नेताओं ने इस मामले में केंद्र पर पर्याप्त दबाव नहीं बनाया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि बिहार में आरक्षण का मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु बना हुआ है। पटना उच्च न्यायालय द्वारा 2023 के आरक्षण संशोधन को रद्द किए जाने के बाद, राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और कानूनी पेचदगियां बढ़ गई हैं। यदि आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जाता है, तो भविष्य में भी कानूनी बाधाएं बनी रहेंगी, जिससे छात्रों और युवाओं का भविष्य अधर में लटक सकता है।

आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए की चुप्पी बिहार के सामाजिक न्याय के एजेंडे को कमजोर कर सकती है।

तेजस्वी यादव ने केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार और पुलिस का इस्तेमाल आम जनता, छात्रों और पत्रकारों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने एक यूट्यूबर, कुंदन कुमार के मामले का उदाहरण दिया, जिन्हें कथित तौर पर मंत्री लखेंद्र पासवान के क्षेत्र में रिपोर्टिंग करने के कारण पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटा गया।

कुंदन कुमार ने मीडिया के सामने अपनी चोटें दिखाकर पुलिसिया बर्बरता का आरोप लगाया। तेजस्वी ने चेतावनी दी कि वह बिहार को 'पुलिस स्टेट' में बदलने की अनुमति नहीं देंगे और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

Frequently Asked Questions

1. बिहार में वर्तमान आरक्षण की स्थिति क्या है?
पटना उच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद, बिहार में आरक्षण की स्थिति कानूनी विवादों के घेरे में है, जिसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की जा रही है।

2. नौवीं अनुसूची में शामिल होने का क्या लाभ है?
नौवीं अनुसूची में शामिल होने से राज्य के आरक्षण कानूनों को न्यायिक समीक्षा से सुरक्षा मिलती है, जिससे उन्हें कोर्ट में चुनौती देना कठिन हो जाता है।

Did You Know?: बिहार में 2023 में आरक्षण सीमा को 50% से बढ़ाकर 65% करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था।