कर्नाटक के नगर प्रशासन मंत्री एच.सी. बालकृष्ण ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में 40% आबादी रहती है, लेकिन उन्हें केंद्र और राज्य से केवल 30% फंड मिलता है। उन्होंने राजस्व बढ़ाने और संपत्ति मूल्यांकन में सुधार के कड़े निर्देश दिए हैं।
- शहरी क्षेत्रों को उनकी आबादी के अनुपात में पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है।
- मंत्री ने संपत्ति मालिकों को 'A' या 'B' खता प्राप्त करने के लिए जागरूक करने का निर्देश दिया।
- नगर निकायों (ULBs) को बकाया किराया वसूलने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने को कहा गया है।
- सफाई कर्मचारियों (पौरकर्मास) के लिए आवासीय लेआउट और सेवानिवृत्ति के बाद भूमि आरक्षण की योजना।
कर्नाटक के नगर प्रशासन मंत्री एच.सी. बालकृष्ण ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के संसाधन जुटाने की क्षमता पर जोर देते हुए एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। मैसूरु में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान, उन्होंने खुलासा किया कि कर्नाटक के शहरी क्षेत्रों में लगभग 40% आबादी निवास करती है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों से मिलने वाली कुल निधि का केवल 30% हिस्सा ही इन क्षेत्रों को आवंटित किया जाता है।
यह असंतुलन शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में एक बड़ी बाधा बना हुआ है। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए राजस्व जुटाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। उन्होंने विशेष रूप से संपत्ति मालिकों को अपनी संपत्तियों का उचित मूल्यांकन कराने और आवश्यक 'A' या 'B' खता प्राप्त करने के लिए जागरूक करने पर बल दिया।
राजस्व वसूली और जवाबदेही
बैठक के दौरान, मंत्री बालकृष्ण ने नगर निकायों द्वारा किराए पर दी गई वाणिज्यिक दुकानों के संबंध में सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिया कि जो व्यापारी निर्धारित समय सीमा के भीतर किराया नहीं चुकाते हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर दुकानें बंद कर दी जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों की लापरवाही के कारण वाणिज्यिक संपत्तियों से राजस्व एकत्र नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शहरी विकास के लिए वित्तीय आत्मनिर्भरता अनिवार्य है, अन्यथा बुनियादी ढांचे का विस्तार असंभव होगा।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, कर्नाटक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बढ़ता यह वित्तीय अंतर भविष्य में शहरी नियोजन और सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
श्रमिक कल्याण और बुनियादी ढांचा
नगर प्रशासन विभाग ने स्वच्छता कर्मचारियों यानी पौरकर्मास के कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पौरकर्मास के लिए आवासीय लेआउट विकसित करने हेतु दो एकड़ भूमि आरक्षित करें। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें साइट प्रदान करने के लिए शहरी सीमाओं के बाहर या ग्रामीण क्षेत्रों में पांच एकड़ भूमि आरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा जाएगा।
इसके अलावा, पेयजल और भूमिगत जल निकासी (drainage) कार्यों में हो रही देरी को दूर करने के लिए जिलावार सूचियों को तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में विधायकों और ठेकेदारों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में शहरीकरण की गति तीव्र है, लेकिन नगर निकायों के पास वित्तीय स्वायत्तता की कमी हमेशा से एक चुनौती रही है। कर्नाटक जैसे राज्यों में, जहाँ शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है, फंड का यह असंतुलन सार्वजनिक सेवाओं जैसे स्वच्छता, सड़क और पानी की आपूर्ति पर दबाव डालता है।
Frequently Asked Questions
1. मंत्री ने 'A' या 'B' खता के बारे में क्या कहा?
मंत्री ने अधिकारियों को संपत्ति मालिकों को खता मूल्यांकन के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया ताकि नगर निकाय अधिक राजस्व प्राप्त कर सकें।
2. पौरकर्मास के लिए क्या विशेष योजना है?
उनके लिए आवासीय लेआउट विकसित करने और सेवानिवृत्ति के बाद भूमि प्रदान करने के लिए भूमि आरक्षित करने की योजना है।