बीजू जनता दल (BJD) ने आरोप लगाया है कि भाजपा सांसदों ने खनन कानून में संशोधन का समर्थन करके ओडिशा के ₹1 लाख करोड़ के बकाया राजस्व को खतरे में डाल दिया है। बीजेडी सांसद संतृप्त मिश्रा ने कहा कि यह संशोधन राज्य के अधिकारों का हनन है।

  • बीजेडी ने भाजपा सांसदों पर ओडिशा के वित्तीय हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया।
  • खनन कानून (MMDR) में संशोधन से राज्य को ₹1 लाख करोड़ के संभावित राजस्व का नुकसान हो सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को खनिज भूमि पर कर लगाने का अधिकार दिया है, लेकिन नए कानून ने इसे सीमित कर दिया है।

ओडिशा की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। बीजू जनता दल (BJD) ने मंगलवार को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ओडिशा के भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसदों ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 का समर्थन किया, जबकि वे जानते थे कि यह कानून राज्य को लगभग ₹1 लाख करोड़ के बकाया राजस्व से वंचित कर सकता है।

बीजेडी राज्यसभा सांसद संतृप्त मिश्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि ओडिशा सरकार ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क दिया था कि यह बकाया राशि राज्य का वैध अधिकार है। उन्होंने कहा, "एडवोकेट जनरल पितांबर आचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया था कि ₹1 लाख करोड़ की बकाया राशि ओडिशा की वैध हकदारी है और यदि यह राशि प्राप्त नहीं होती है, तो राज्य को भारी वित्तीय नुकसान होगा।"

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि ओडिशा की आर्थिक संप्रभुता का मामला है। नए कानून की धारा 9D यह प्रावधान करती है कि संशोधन लागू होने से पहले का कोई भी कर, उपकर (cess) या अन्य लेवी जो राज्य सरकार द्वारा वसूल नहीं किया गया है, उसे अवैध माना जाएगा। यह प्रावधान सीधे तौर पर उन राजस्व स्रोतों को काट देता है जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के पक्ष में माना था।

नया संशोधन राज्यों के खनिज संसाधनों पर उनके संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों को स्थायी रूप से छीनने का एक प्रयास है।

पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने इस संशोधन का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने विशेष रूप से धारा 9D के समावेश पर आपत्ति जताई थी। गौरतलब है कि जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की पीठ ने निर्णय दिया था कि राज्य खनिज भूमि पर कर लगा सकते हैं। हालांकि, केंद्र सरकार के इस नए कानून ने उस निर्णय के प्रभाव को काफी हद तक सीमित कर दिया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ओडिशा सरकार की आधिकारिक पत्रिका 'ओडिशा रिव्यू' (नवंबर 2025) ने भी इस वित्तीय लाभ की संभावनाओं को रेखांकित किया था। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, ओडिशा को 1 अप्रैल 2005 से खनिज भूमि पर कर लगाने का अधिकार मिल सकता था, जिससे राज्य को अगले 12 वर्षों में ₹1 लाख करोड़ से अधिक की प्राप्ति हो सकती थी।

Did You Know?: ओडिशा भारत के सबसे समृद्ध खनिज भंडारों में से एक है, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. बीजेडी का मुख्य आरोप क्या है?
बीजेडी का आरोप है कि भाजपा सांसदों ने ऐसे कानून का समर्थन किया जो ओडिशा को ₹1 लाख करोड़ के राजस्व से वंचित करता है।

2. MMDR संशोधन अधिनियम क्या है?
यह खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में किया गया एक संशोधन है, जो खनिज अधिकारों पर कर और लेवी से संबंधित नियमों को बदलता है।