दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के लिए ₹1 लाख के इंडेमनिटी बॉन्ड की अनिवार्यता को चुनौती देते हुए एआईएसए ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। संगठन का तर्क है कि यह नियम छात्रों की स्वायत्तता का उल्लंघन करता है और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को चुनाव से रोकता है।
- एआईएसए ने दिल्ली विश्वविद्यालय के ₹1 लाख के जमानत बॉन्ड के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
- छात्र संगठन का आरोप है कि यह नियम महिलाओं और आर्थिक रूप से निर्भर छात्रों के लिए बाधा है।
- चुनाव समिति का कहना है कि यह नियम पिछले साल भी लागू था और इसके लिए बैंक में पैसे होना जरूरी नहीं है।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के आगामी चुनावों को लेकर विवाद गहरा गया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा उम्मीदवारों के लिए ₹1 लाख का इंडेमनिटी एफिडेविट और पैरेंटल स्योरिटी बॉन्ड जमा करने की अनिवार्यता को चुनौती दी गई है।
18 सितंबर को होने वाले चुनावों के लिए चुनाव समिति ने एक हलफनामा जारी किया है। इस नियम के तहत उम्मीदवारों को यह घोषणा करनी होगी कि उनके माता-पिता को उनके चुनाव लड़ने की जानकारी है। साथ ही, किसी भी नियम या दिशा-निर्देश के उल्लंघन की स्थिति में माता-पिता या अभिभावकों को ₹1 लाख की राशि के भुगतान के लिए गारंटी (surety) देनी होगी।
स्वायत्तता और समानता पर सवाल
एआईएसए के कार्यकर्ताओं, अनन्या रतुरी और अक्षत शिखर द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया है कि विश्वविद्यालय में आने वाले छात्र स्वायत्त वयस्क हैं। संगठन का कहना है कि छात्रों को किसी भी बाहरी प्राधिकरण की सहमति के बिना चुनाव लड़ने का अधिकार है। एआईएसए ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि यह नियम यह मानकर चलता है कि केवल माता-पिता ही छात्रों की शिक्षा का खर्च उठाते हैं।
संगठन ने यह गंभीर आरोप लगाया है कि ₹1 लाख के बॉन्ड की यह शर्त विशेष रूप से महिलाओं और उन छात्रों के लिए एक बड़ी बाधा साबित होगी जो आर्थिक रूप से अपने परिवारों पर निर्भर हैं। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समावेशिता कम हो सकती है।
छात्र राजनीति में वित्तीय बाधाएं अक्सर उन आवाजों को दबा देती हैं जो सत्ता को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक बॉन्ड की राशि का नहीं है, बल्कि यह छात्र राजनीति में 'समान अवसर' (Equal Opportunity) के सिद्धांत से जुड़ा है। यदि यह नियम बना रहता है, तो यह केवल संपन्न पृष्ठभूमि वाले छात्रों को ही नेतृत्व के पदों तक पहुँचने की अनुमति दे सकता है।
दूसरी ओर, डूसू के मुख्य चुनाव अधिकारी राज किशोर शर्मा ने स्पष्ट किया है कि यह प्रावधान पिछले वर्ष भी लागू था। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार को अपने खाते में ₹1 लाख रखने की आवश्यकता नहीं है; यदि माता-पिता के विवरण उपलब्ध नहीं हैं, तो उम्मीदवार किसी मित्र को भी गारंटी देने के लिए पेश कर सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
DUSU चुनाव भारत के सबसे बड़े छात्र संघ चुनावों में से एक माने जाते हैं। पिछले वर्षों में भी, विश्वविद्यालय द्वारा लगाए गए विभिन्न नियमों और सुरक्षा जमा राशियों को लेकर छात्र आंदोलनों और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एआईएसए की मुख्य आपत्ति क्या है?
उत्तर: एआईएसए का कहना है कि ₹1 लाख का बॉन्ड छात्रों की स्वायत्तता को कम करता है और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को चुनाव लड़ने से रोकता है।
प्रश्न 2: क्या उम्मीदवारों के पास ₹1 लाख होना अनिवार्य है?
उत्तर: चुनाव अधिकारी के अनुसार, यह केवल एक गारंटी बॉन्ड है, इसके लिए खाते में नकदी होना आवश्यक नहीं है।