कश्मीर घाटी में मेडिकल इंटर्न अपने स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर तीसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस आंदोलन में शामिल होकर सरकार की नीतियों की आलोचना की है।
- मेडिकल इंटर्न ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं।
- महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में रात भर चलने वाले विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
- इंटर्न पिछले सात वर्षों से स्टाइपेंड में वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं।
- स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मामला वित्त विभाग के पास विचाराधीन है।
कश्मीर घाटी के विभिन्न अस्पतालों में कार्यरत मेडिकल इंटर्न अपने मासिक स्टाइपेंड में भारी वृद्धि की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बुधवार रात श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में डॉक्टरों के साथ रात भर चलने वाली निगरानी (vigil) में हिस्सा लिया।
महबूबा मुफ्ती ने इस स्थिति पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उन युवा डॉक्टरों को बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष करते देखना 'अत्यंत पीड़ादायक' है, जो मरीजों की जान बचाने के लिए 36 घंटे की थका देने वाली शिफ्ट करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये डॉक्टर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ हैं और सरकार को उनकी गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल वेतन का मामला नहीं है, बल्कि कश्मीर की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की स्थिरता से जुड़ा मुद्दा है। यदि प्रशिक्षु डॉक्टर आर्थिक तंगी के कारण इस पेशे से विमुख होते हैं, तो इसका सीधा असर भविष्य में मरीजों की देखभाल पर पड़ेगा।
वर्तमान में, इन इंटर्नों को प्रति माह केवल ₹12,000 के आसपास स्टाइपेंड मिलता है, जो पिछले सात वर्षों से नहीं बदला गया है। डॉक्टरों का तर्क है कि यह राशि इतनी कम है कि इसमें अस्पताल तक आने-जाने का खर्च भी पूरा नहीं होता। वे मांग कर रहे हैं कि इसे अन्य राज्यों के समान ₹30,000 किया जाए।
"एक सरकार जो उनसे बलिदान के साथ सेवा करने की अपेक्षा करती है, उसे उनके सम्मान और बुनियादी जरूरतों का भी सम्मान करना चाहिए।" - महबूबा मुफ्ती
इस विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। कांग्रेस, जो राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की गठबंधन सहयोगी है, ने भी मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला से इस मामले को तुरंत हल करने का आग्रह किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने पत्र लिखकर कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्टाइपेंड देश के अन्य हिस्सों की तुलना में काफी कम है।
दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू ने कहा कि सरकार इस मामले पर विचार कर रही है, लेकिन इसमें वित्तीय निहितार्थ शामिल हैं, जिसके कारण यह मामला वर्तमान में वित्त विभाग के पास विचाराधीन है। उन्होंने यह भी कहा कि हड़ताल से मरीज देखभाल प्रभावित होती है, लेकिन डॉक्टरों ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि वे पिछले एक साल से केवल आश्वासन सुन रहे हैं।
Frequently Asked Questions
1. मेडिकल इंटर्न मुख्य रूप से क्या मांग कर रहे हैं?
इंटर्न अपने मासिक स्टाइपेंड को ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग कर रहे हैं।
2. सरकार का इस पर क्या रुख है?
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, मामला वित्त विभाग के पास समीक्षा के लिए है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें केवल लंबे समय से आश्वासन मिल रहे हैं।