तेलंगाना की आठ राजनीतिक पार्टियों ने सरकार से 2011 के लाइसेंस प्राप्त कृषक अधिनियम को तुरंत लागू करने और बटाईदार किसानों की पहचान करने का आग्रह किया है। किसानों की मांग है कि उन्हें पहचान पत्र दिए जाएं और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिले।
- आठ राजनीतिक दलों ने 2011 के लाइसेंस प्राप्त कृषक अधिनियम को लागू करने की मांग की।
- तेलंगाना में लगभग 22 लाख बटाईदार किसान परिवार प्रभावित हैं।
- किसानों की मांग है कि उन्हें एमएसपी (MSP) पर सीधे उपज बेचने की अनुमति मिले।
- कांग्रेस सरकार से चुनावी वादों को पूरा करने का आग्रह किया गया है।
हैदराबाद: तेलंगाना में कृषि संकट के बीच, आठ प्रमुख राजनीतिक दलों ने राज्य सरकार पर 2011 के लाइसेंस प्राप्त कृषक अधिनियम (Licensed Cultivators Act) को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। तेलंगाना बटाईदार किसान पहचान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित एक सर्वदलीय बैठक में, दलों ने मांग की कि सरकार मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान ही बटाईदार किसानों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू करे।
बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि बटाईदार किसानों को आधिकारिक पहचान पत्र जारी किए जाने चाहिए। इन पहचान पत्रों के माध्यम से, किसान अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधे सरकारी खरीद एजेंसियों को बेचने में सक्षम होंगे। यह कदम उन लाखों परिवारों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है जो भूमि स्वामित्व के बिना खेती कर रहे हैं।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि तेलंगाना की कृषि अर्थव्यवस्था में बटाईदार किसानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन वे अक्सर नीतिगत निर्णयों से बाहर रह जाते हैं। वर्तमान में, PM-KISAN जैसी प्रमुख सरकारी योजनाएं भूमि स्वामित्व और ओटीपी-आधारित सत्यापन पर निर्भर हैं, जिससे बटाईदार किसान लाभ से वंचित हो रहे हैं।
बटाईदार किसान कृषि उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा संभालते हैं, लेकिन भूमि रिकॉर्ड की कमी उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से दूर रखती है।
आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना में लगभग 36% कृषक परिवार बटाईदार हैं, जो लगभग 22 लाख परिवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीतिक दलों ने पूर्ववर्ती बीआरएस (BRS) सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि 2017 के बाद इस अधिनियम के कार्यान्वयन को रोक दिया गया था। अब, कांग्रेस सरकार से आग्रह किया गया है कि वह मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी द्वारा विधानसभा चुनावों से पहले किए गए वादों को पूरा करे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2011 का अधिनियम तेलंगाना में उन किसानों को कानूनी मान्यता देने के लिए बनाया गया था जो दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं। इसका उद्देश्य उन्हें पहचान प्रदान करना और उन्हें कृषि ऋण, उर्वरक सब्सिडी और सरकारी खरीद प्रणालियों तक पहुंच सुनिश्चित करना था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस प्रक्रिया में ठहराव आ गया था।
Frequently Asked Questions
1. बटाईदार किसान कौन हैं?
वे किसान जो दूसरों की भूमि को पट्टे या अन्य समझौतों के तहत खेती के लिए उपयोग करते हैं, लेकिन भूमि के कानूनी मालिक नहीं होते हैं।
2. 2011 का अधिनियम क्या लाभ देता है?
यह अधिनियम बटाईदार किसानों को पहचान पत्र प्रदान करने और उन्हें सरकारी योजनाओं एवं एमएसपी पर फसल बेचने का अधिकार देने का प्रावधान करता है।