पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेडातु बांध परियोजना का कड़ा विरोध करने का आग्रह किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस परियोजना को तुरंत खारिज करने की मांग की है।

  • पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने मेकेडातु बांध के खिलाफ तमिलनाडु की लड़ाई तेज करने की मांग की।
  • कर्नाटक ने परियोजना की मंजूरी के लिए केंद्रीय जल आयोग (CWC) से संपर्क किया है।
  • रामदास ने मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से मिलने का आग्रह किया।

पट्टाली मक्कल कत्ची (PMK) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने गुरुवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेडातु बांध परियोजना का विरोध करने के लिए राज्य के प्रयासों को तेज करने का आह्वान किया है। यह मांग कर्नाटक के सिंचाई मंत्री चलुवरैया स्वामी की केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अध्यक्ष अनुपम प्रसाद के साथ हालिया मुलाकात के बाद आई है।

रामदास ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कर्नाटक इस परियोजना को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि तमिलनाडु सरकार इस मामले में "उदासीन" बनी हुई है। कर्नाटक के मंत्री ने प्रस्तावित बांध स्थल के तत्काल निरीक्षण की मांग की है और आश्वासन दिया है कि राज्य आवश्यक तकनीकी जानकारी प्रदान करेगा।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मेकेडातु बांध मुद्दा केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि यह कावेरी नदी जल विवाद के गहरे ऐतिहासिक और कानूनी आयामों से जुड़ा है। यदि कर्नाटक को इस परियोजना के लिए मंजूरी मिलती है, तो इससे तमिलनाडु के किसानों के जल अधिकारों और कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) के अंतिम फैसले पर गंभीर संकट आ सकता है।

यदि तमिलनाडु सरकार ने इस समय सक्रिय रुख नहीं अपनाया, तो कावेरी के पानी पर राज्य का नियंत्रण स्थायी रूप से खतरे में पड़ सकता है।

ऐतिहासिक संदर्भ में, कर्नाटक ने 2019 में इस परियोजना के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत की थी। हालांकि, 29 जून को CWC ने इसे यह कहते हुए वापस कर दिया था कि इसके प्रावधान कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विपरीत हैं। इसके बाद कर्नाटक ने अगस्त में एक संशोधित DPR जमा की है।

अंबुमणि रामदास ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे CWC अध्यक्ष, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और प्रधानमंत्री से मिलकर इस परियोजना को पूरी तरह से खारिज करने की मांग करें। उन्होंने 2018 में कर्नाटक को DPR जमा करने के लिए दी गई अनुमति को भी वापस लेने की मांग की है।

क्या आप जानते हैं?: कावेरी नदी विवाद भारत के सबसे लंबे समय तक चलने वाले अंतर-राज्यीय जल विवादों में से एक है, जो दशकों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तनाव का मुख्य कारण रहा है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मेकेडातु बांध परियोजना क्या है?
उत्तर: यह कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित एक बांध परियोजना है जिसका उद्देश्य कावेरी नदी के पानी का प्रबंधन करना है, लेकिन तमिलनाडु इसे अपने जल अधिकारों का उल्लंघन मानता है।

प्रश्न 2: अंबुमणि रामदास ने सरकार से क्या करने को कहा है?
उत्तर: उन्होंने मुख्यमंत्री से केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं से मिलकर इस परियोजना के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने और इसे रद्द करवाने का आग्रह किया है।