पूर्व मंत्री किमने रत्नाकर ने पश्चिमी घाटों में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) अधिसूचना के खिलाफ तीर्थहल्ली में विरोध मार्च की घोषणा की है। उन्होंने कास्तूरीरंगन समिति की सिफारिशों का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण मानव जीवन की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

  • किमने रत्नाकर 7 सितंबर को तीर्थहल्ली में विरोध मार्च (पदयात्रा) का नेतृत्व करेंगे।
  • विरोध का मुख्य कारण कास्तूरीरंगन समिति की ESA अधिसूचना है।
  • पदयात्रा बिंकला गांव से शुरू होकर तीर्थहल्ली तक जाएगी।
  • रत्नाकर ने स्पष्ट किया कि वे वन्यजीव संरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के अधिकारों की कीमत पर नहीं।

कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता किमने रत्नाकर ने पश्चिमी घाटों के संबंध में कास्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) अधिसूचना के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। शिवमोग्गा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, उन्होंने घोषणा की कि आगामी 7 सितंबर को तीर्थहल्ली तालुक में एक विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी।

यह विरोध मार्च सुबह 9 बजे तीर्थहल्ली तालुक के बिंकला गांव से शुरू होगा। रत्नाकर ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि बिंकला गांव उन्हीं गांवों में से एक है जो वर्तमान अधिसूचना की सूची में शामिल हैं। इस मार्च का उद्घाटन जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रसन्ना कुमार और पार्टी की अभियान समिति के जिला अध्यक्ष रमेश हेगड़े करेंगे। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा और पूर्व मंत्री विनय कुमार सोराके जैसे प्रमुख नेता भी शामिल होंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विरोध केवल एक राजनीतिक रैली नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी घाट के 'मालनाड' क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों के अस्तित्व और आजीविका का सवाल है। ESA अधिसूचना के लागू होने से स्थानीय समुदायों पर भूमि उपयोग और कृषि पर कड़े प्रतिबंध लग सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय असंतोष बढ़ रहा है।

रत्नाकर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे भाजपा के साथ मिलकर मार्च नहीं करेंगे। उन्होंने तर्क दिया कि यदि भाजपा वास्तव में इस मुद्दे पर चिंतित है, तो उन्हें केंद्र में अपनी सरकार से इस अधिसूचना को वापस लेने की अपील करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "हमें केंद्र में भाजपा के खिलाफ नारे लगाने हैं, उनके साथ मार्च नहीं करना है।"

"मैं वन्यजीवों और पश्चिमी घाटों के संरक्षण के पक्ष में हूँ, लेकिन यह मानव जीवन की कीमत पर नहीं होना चाहिए।" - किमने रत्नाकर

विवाद का मुख्य केंद्र कास्तूरीरंगन समिति की वे सिफारिशें हैं जो मालनाड क्षेत्र के लोगों पर कई प्रतिबंध लगाती हैं। रत्नाकर ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक बिंदु उठाते हुए कहा कि पिछले 100 वर्षों में भारत की जनसंख्या 20 करोड़ से बढ़कर 140 करोड़ हो गई है। ऐसे में लोगों को घर बनाने और खेती करने के लिए भूमि की आवश्यकता है, और वन भूमि में बसे लोगों के अधिकारों की अनदेखी करना अनुचित है।

Did You Know?: पश्चिमी घाट, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है, दुनिया के आठ 'सबसे गर्म हॉटस्पॉट' में से एक है।

Frequently Asked Questions

1. विरोध मार्च कब और कहाँ होगा?
विरोध मार्च 7 सितंबर को सुबह 9 बजे तीर्थहल्ली के बिंकला गांव से शुरू होगा।

2. किमने रत्नाकर का मुख्य विरोध क्या है?
उनका मुख्य विरोध कास्तूरीरंगन समिति की ESA अधिसूचना से है, जो स्थानीय निवासियों पर प्रतिबंध लगाती है।