झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने RINPAS के निदेशक पद के लिए जारी विज्ञापन में NMC नियमों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस विज्ञापन को रद्द करने और नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।

  • बाबूलाल मरांडी ने RINPAS निदेशक भर्ती में NMC नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
  • विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता और पात्रता मानदंडों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
  • मरांडी ने गैर-चिकित्सा संकाय (Non-Medical Faculty) को नियुक्त करने के प्रयासों पर सवाल उठाए।
  • उन्होंने मुख्यमंत्री से विज्ञापन को तुरंत रद्द करने की मांग की है।

झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड अलाइड साइंसेज (RINPAS) के निदेशक की नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन में गंभीर अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। गुरुवार को उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखकर इस मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

मरांडी ने तर्क दिया कि 26 अगस्त, 2026 को जारी किया गया विज्ञापन, जो एक प्रतिष्ठित राज्य संस्थान के लिए है, कई तकनीकी और कानूनी त्रुटियों से भरा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि विज्ञापन में निदेशक पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता या पात्रता मानदंड का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जो किसी भी उच्च स्तरीय नियुक्ति के लिए अनिवार्य है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, चिकित्सा संस्थानों के नेतृत्व में पारदर्शिता का अभाव न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह सीधे तौर पर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। यदि एक विशेषज्ञ संस्थान का नेतृत्व गैर-चिकित्सा अधिकारी करता है, तो संस्थान की गरिमा और कार्यक्षमता दोनों संकट में पड़ सकती हैं।

चिकित्सा संस्थानों का नेतृत्व केवल अनुभवी और वरिष्ठ चिकित्सा चिकित्सकों द्वारा ही किया जाना चाहिए ताकि संस्थान की विशेषज्ञता बनी रहे।

मरांडी ने आगे आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग ने 14 अक्टूबर, 2024 को नियमों में बदलाव करके गैर-चिकित्सा संकाय (Non-Medical Faculty) को भी पात्र बनाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि यह कदम NMC द्वारा अधिसूचित गजट के पूर्णतः विपरीत है, जो स्पष्ट रूप से कहता है कि केवल 'मेडिकल फैकल्टी' के लोग ही इन पदों के लिए योग्य हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने आशंका व्यक्त की कि राज्य सरकार द्वारा बनाए गए ये नए नियम किसी विशेष व्यक्ति या 'पसंदीदा गैर-चिकित्सा अधिकारी' को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से बनाए गए प्रतीत होते हैं। उन्होंने मांग की कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और केवल चिकित्सा कैडर के योग्य, सक्षम और ईमानदार अधिकारियों को ही अवसर दिया जाए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

RINPAS झारखंड का एक प्रमुख संस्थान है जो न्यूरो-साइकियाट्री और संबद्ध विज्ञानों में विशेषज्ञता रखता है। पिछले कई वर्षों से, संस्थान का संचालन एक 'प्रभारी निदेशक' (Incharge Director) द्वारा किया जा रहा है, जिससे वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय लेने में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

Did You Know?: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) भारत में चिकित्सा शिक्षा और संस्थानों के मानकों को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च संस्था है।

Frequently Asked Questions

1. बाबूलाल मरांडी ने क्या मांग की है?
उन्होंने RINPAS निदेशक के लिए जारी विज्ञापन को रद्द करने और NMC के मानदंडों के अनुसार नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।

2. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद का मुख्य कारण गैर-चिकित्सा संकाय के सदस्यों को निदेशक पद के लिए पात्र बनाना और योग्यता मानदंडों का स्पष्ट न होना है।