2027 की जनगणना में जाति गणना को लेकर सरकारी विभागों के बीच मतभेद उभर कर सामने आए हैं। सामाजिक न्याय मंत्रालय ने रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय द्वारा तैयार किए गए शुरुआती ड्राफ्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है।
- 2027 की जनगणना में जाति गणना को लेकर सरकार और मंत्रालय के बीच डेटा साझा करने को लेकर विवाद।
- सामाजिक न्याय मंत्रालय ने रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय के शुरुआती नोट को 'ट्रैप' बताया।
- सरकार 'ओपन-एंडेड' फॉर्मेट अपनाने पर अड़ी है, जबकि विपक्ष सटीक डेटा की मांग कर रहा है।
नई दिल्ली में 2027 की जनगणना में जाति गणना को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान अब सरकारी गलियारों के भीतर प्रशासनिक संघर्ष में बदल गई है। हालिया खुलासे से पता चला है कि रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (ORGI) और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) के बीच महत्वपूर्ण बैठकों के मिनट्स (कार्यवृत्त) को लेकर गहरा मतभेद है।
सूत्रों के अनुसार, 1 जून को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मंत्रालय के अधिकारियों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) द्वारा बनाए गए ओबीसी (OBC) सूची को साझा करने की पेशकश की थी। हालांकि, रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय द्वारा तैयार किए गए शुरुआती ड्राफ्ट में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को सही ढंग से नहीं दर्शाया गया था। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि शुरुआती ड्राफ्ट में यह कहा गया था कि उनके पास कोई संवैधानिक अधिदेश नहीं है, जो कि तथ्यों के विपरीत था।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं है, बल्कि डेटा की सटीकता और जिम्मेदारी तय करने की लड़ाई है। यदि सरकार 'ओपन-एंडेड' प्रश्न (जहाँ लोग खुद अपनी जाति लिखें) का उपयोग करती है, तो करोड़ों अलग-अलग जवाबों को मानकीकृत करना एक बड़ी चुनौती होगी।
डेटा की सटीकता के बिना सामाजिक न्याय की नीतियां केवल कागजों तक सीमित रह सकती हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उनके पास 1,258 अनुसूचित जातियों (SC) और 2,483 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की प्रविष्टियों वाली सूची मौजूद है। मंत्रालय के अधिकारियों ने रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय के पुराने नोट को एक 'जाल' (trap) करार दिया, क्योंकि इससे डेटा साझा करने की जिम्मेदारी मंत्रालय पर डालने की कोशिश की जा रही थी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2011 के सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) के दौरान भारी डेटा विसंगतियां देखी गई थीं। उस समय 4,147 जातियों के मुकाबले 46.7 लाख अलग-अलग जाति नाम दर्ज किए गए थे, जिससे डेटा का विश्लेषण करना लगभग असंभव हो गया था। यही कारण है कि सरकार अब ड्रॉप-डाउन मेनू के बजाय खुले प्रश्न पूछने का विकल्प चुन रही है।
| विशेषता | 2011 SECC | 2027 प्रस्तावित जनगणना |
|---|---|---|
| फॉर्मेट | ड्रॉप-डाउन/सूची आधारित | ओपन-एंडेड (खुला प्रश्न) |
| मुख्य चुनौती | डेटा का अत्यधिक विस्तार | डेटा का मानकीकरण |
Frequently Asked Questions
1. सरकार जाति जनगणना के लिए कौन सा फॉर्मेट अपना रही है?
सरकार ड्रॉप-डाउन मेनू के बजाय 'ओपन-एंडेड' फॉर्मेट अपना रही है ताकि राज्य स्वयं जाति पहचान का निर्णायक न बने।
2. विपक्ष का इस पर क्या रुख है?
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेताओं का कहना है कि सटीक डेटा के बिना सामाजिक न्याय लागू करना संभव नहीं है।