कर्नाटक के उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने PM-SETU योजना के माध्यम से राज्य के ITIs को आधुनिक बनाने के लिए निजी क्षेत्र के साथ सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस योजना का लक्ष्य कौशल विकास और रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।
- PM-SETU योजना के तहत कर्नाटक के 48 ITIs का आधुनिकीकरण किया जाएगा।
- केंद्र सरकार ₹60,000 करोड़ की इस योजना के माध्यम से देश भर में 1,000 ITIs को अपग्रेड कर रही है।
- उद्योगों को पाठ्यक्रम डिजाइन करने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सीधे शामिल होने का अवसर मिलेगा।
- बेंगलुरु और कलबुर्गी को इस योजना के लिए 'हब' के रूप में चुना गया है।
कर्नाटक के बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में कहा कि PM-SETU योजना (Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) की सफलता के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच गहन तालमेल आवश्यक है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के 48 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को आधुनिक, उद्योग-आधारित कौशल केंद्रों में बदलना है।
हब-एंड-स्पोक मॉडल और कार्यान्वयन
कौशल विकास मंत्री शरण प्रकाश पाटिल ने बताया कि यह योजना 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल पर आधारित है। इसके तहत प्रत्येक हब से चार 'स्पोक' संस्थान जुड़े होंगे। कर्नाटक में कुल 12 हब और 48 ITIs निर्धारित किए गए हैं। वर्तमान में, बेंगलुरु शहरी और कलबुर्गी जिलों में एक-एक हब का चयन किया गया है।
क्षेत्रीय वितरण का विवरण
बेंगलुरु शहरी क्षेत्र में, पीन्या ITI को हब के रूप में नामित किया गया है, जबकि तुमकुरु रोड, डमलोर, होसुर रोड और देवनहल्ली ITIs इसके स्पोक संस्थान होंगे। उत्तर कर्नाटक में, कलबुर्गी सरकारी ITI (लड़कों के लिए) हब के रूप में कार्य करेगा, जिसके साथ सेदाम, अफजलपुर, जेवरगी और कलबुर्गी सरकारी ITI (लड़कियों के लिए) जुड़े होंगे।
उद्योगों के लिए अवसर और भागीदारी
इस योजना के कार्यान्वयन के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) का गठन किया जाएगा, जिसमें छह उद्योग प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। कंपनियां अपनी CSR गतिविधियों के माध्यम से इस योजना का हिस्सा बन सकती हैं। पात्रता के लिए, कंपनियों का वार्षिक टर्नओवर कम से कम ₹500 करोड़ और कर्मचारियों की संख्या 1,000 से अधिक होनी चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह पहल केवल बुनियादी ढांचे के उन्नयन के बारे में नहीं है, बल्कि उद्योग और शिक्षा के बीच की खाई को पाटने के बारे में है। जब उद्योग सीधे पाठ्यक्रम डिजाइन करने में शामिल होते हैं, तो छात्रों को वही कौशल मिलता है जिसकी बाजार में मांग है, जिससे बेरोजगारी की समस्या का समाधान होता है।
उद्योगों की भागीदारी से कौशल विकास केवल एक शैक्षणिक प्रक्रिया न रहकर एक आर्थिक इंजन बन जाएगा।
सरकार ने इस योजना के लिए वित्तीय आवंटन भी स्पष्ट कर दिया है। केंद्र सरकार ₹112 करोड़, राज्य सरकार ₹98 करोड़ और औद्योगिक क्षेत्र ₹31 करोड़ का योगदान देगा। मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि कर्नाटक में 270 सरकारी ITIs हैं, और यदि उद्योग इन्हें गोद लेने के लिए आगे आते हैं, तो सरकार इसका स्वागत करेगी।
Frequently Asked Questions
1. PM-SETU योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक ₹60,000 करोड़ की योजना है जिसका उद्देश्य ITIs को आधुनिक बनाना और छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाना है।
2. कौन सी कंपनियां इस योजना में भाग ले सकती हैं?
ऐसी कंपनियां जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹500 करोड़ से अधिक है और 1,000 से अधिक कर्मचारी हैं, वे पात्र हैं।