उपराष्ट्रपति और चूँकि पंजब विश्वविद्यालय के चांसलर सी पी राधाकृष्णन ने छात्रों को संबोधित करते हुए राजनीति और जीवन के संघर्षों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी का जिक्र करते हुए 'पीठ में छुरा घोंपने' की राजनीति पर बात की और कैंपस सुरक्षा पर भी जोर दिया।
- उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने पंजब विश्वविद्यालय में छात्रों को जीवन की चुनौतियों और असफलताओं से न डरने की सलाह दी।
- उन्होंने कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का नाम लेते हुए राजनीति में 'पीठ में छुरा घोंपने' की प्रवृत्ति का जिक्र किया।
- पीएचडी छात्र की मृत्यु के बाद उपराष्ट्रपति ने पूरे कैंपस के सुरक्षा ऑडिट के आदेश दिए हैं।
- उन्होंने छात्रों को नशा मुक्त भारत बनाने के लिए नशे से दूर रहने का आह्वान किया।
चंडीगढ़ स्थित पंजब विश्वविद्यालय के अपने पहले दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के चांसलर सी पी राधाकृष्णन ने एक अत्यंत प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से चर्चित भाषण दिया। छात्रों को संबोधित करते हुए, उन्होंने न केवल उनके भविष्य के लिए मार्गदर्शन किया, बल्कि राजनीति की कड़वी सच्चाई को भी उजागर किया।
राधाकृष्णन ने जीवन में आने वाली असफलताओं को स्वाभाविक बताते हुए कहा कि मानसिक मजबूती ही आगे बढ़ने की कुंजी है। उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा, "पीठ में छुरा घोंपना हर जगह है... आप मनीष तिवारी जी से पूछिए। उन्होंने अपने करियर में कितनी बार पीठ में छुरा घोंपा महसूस किया है।" उनका यह इशारा हाल ही में कांग्रेस द्वारा चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी को संगठन की समितियों से बाहर रखे जाने के बाद आया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
राजनीतिक संदर्भ और टिप्पणी
उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि राजनीति हो या व्यक्तिगत जीवन, विश्वासघात एक वास्तविकता है। उन्होंने कहा कि मंच पर बैठे सभी लोगों को, जिनमें वे स्वयं भी शामिल हैं, ऐसे अनुभवों का सामना करना पड़ा है। मनीष तिवारी का संदर्भ उस समय आया जब वे अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी असुरक्षाओं को लेकर टिप्पणी कर रहे थे।
सुरक्षा और अनुसंधान पर जोर
विश्वविद्यालय में एक पीएचडी छात्र की दुखद मृत्यु के बाद, उपराष्ट्रपति ने सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने अधिकारियों को पूरे परिसर का व्यापक सुरक्षा ऑडिट करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। एक आंतरिक समिति इस मामले की जांच कर रही है।
विश्वविद्यालयों को अपने अनुसंधान को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ना चाहिए ताकि भारत एक विकसित अर्थव्यवस्था बन सके।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, राधाकृष्णन का यह दौरा केवल उद्घाटन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रयोगशालाओं से निकलने वाले विचार केवल दीवारों के भीतर नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें 'विकसित भारत' के निर्माण में वैश्विक योगदान देना चाहिए।
नशा मुक्त भारत का आह्वान
छात्रों को संबोधित करते हुए, उन्होंने देश की सीमाओं और सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने छात्रों से 'नशा मुक्त भारत' के निर्माण में योगदान देने और स्वयं को किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों के नियंत्रण से दूर रखने का आग्रह किया।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: उपराष्ट्रपति ने सुरक्षा ऑडिट के आदेश क्यों दिए?
उत्तर: हाल ही में परिसर में एक पीएचडी छात्र की मृत्यु के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए।
प्रश्न 2: उपराष्ट्रपति ने मनीष तिवारी का उल्लेख क्यों किया?
उत्तर: उन्होंने राजनीति में होने वाले विश्वासघात और संघर्षों के उदाहरण के रूप में उनका नाम लिया।