बीजेपी एमएलसी एन. रविकुमार ने राज्य सरकार पर सूखे से प्रभावित तालुकों की सूची में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक आधार के बजाय राजनीतिक प्रभाव के आधार पर क्षेत्रों का चयन किया गया है।

  • बीजेपी एमएलसी एन. रविकुमार ने कर्नाटक सरकार पर सूखे प्रभावित क्षेत्रों की सूची में पक्षपात का आरोप लगाया।
  • कलबुर्गी जिले के किसी भी तालुक को सूची से बाहर रखा गया है, जबकि फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।
  • यादगीर के शोरपुर, यादगीर और गुरमिटकल जैसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों को नजरअंदाज किया गया है।
  • बीजेपी ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आधार पर सूची को तुरंत संशोधित करने की मांग की है।

कर्नाटक में सूखे की मार झेल रहे किसानों के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एमएलसी एन. रविकुमार ने राज्य सरकार की हालिया घोषणा का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने सूखे से प्रभावित तालुकों की सूची तैयार करने में स्पष्ट रूप से भेदभाव किया है। यादगीर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, उन्होंने कहा कि सरकार केवल उन्हीं क्षेत्रों को पहचान रही है जो राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं, जबकि पूरा राज्य भीषण सूखे की चपेट में है।

रविकुमार ने डेटा प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य की लगभग 75% कृषि भूमि सूखे की गंभीर स्थिति से प्रभावित है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि कलबुर्गी जिले के एक भी तालुक को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है, जबकि रायचूर, गदग, बेलगावी और कोप्पल जैसे जिलों में फसलों का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने इन रिपोर्टों को 'अवैज्ञानिक' करार दिया और आरोप लगाया कि सरकार ने जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सूखे की सूची में विसंगतियां न केवल राजनीतिक विवाद का कारण बनती हैं, बल्कि यह उन लाखों किसानों के जीवन और आजीविका को सीधे प्रभावित करती हैं जो सरकारी मुआवजे पर निर्भर हैं। यदि प्रभावित क्षेत्रों का सही आकलन नहीं किया जाता है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गहरा असंतोष पैदा हो सकता है और भविष्य में कृषि संकट और बढ़ सकता है।

सरकार को राजनीतिक लाभ के बजाय वैज्ञानिक फसल-क्षति सर्वेक्षणों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि वास्तविक पीड़ितों को राहत मिल सके।

यादगीर जिले के संदर्भ में बात करते हुए, एमएलसी ने कहा कि शोरपुर, यादगीर और गुरमिटकल जैसे तालुक सूखे की भीषण स्थिति से जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों को सूची से बाहर रखना यादगीर के किसानों के साथ घोर अन्याय है। उन्होंने 2022 के सूखे का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे तत्कालीन सरकार ने प्रति एकड़ ₹18,500 की राहत राशि प्रदान की थी, जिससे 38 लाख से अधिक किसानों को लाभ हुआ था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक का उत्तरी क्षेत्र, विशेष रूप से कलबुर्गी और यादगीर, ऐतिहासिक रूप से वर्षा की कमी और सूखे के प्रति संवेदनशील रहा है। पिछले दशकों में, राज्य ने विभिन्न आपदा राहत कोषों (NDRF) के माध्यम से राहत प्रदान की है, लेकिन फसल चक्र में अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन ने कृषि संकट को और अधिक जटिल बना दिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: बीजेपी एमएलसी ने किन क्षेत्रों को सूची से बाहर रखे जाने का आरोप लगाया है?
उत्तर: उन्होंने कलबुर्गी जिले और यादगीर के शोरपुर, यादगीर एवं गुरमिटकल जैसे क्षेत्रों को सूची से बाहर रखे जाने का आरोप लगाया है।

प्रश्न 2: एमएलसी ने सरकार से क्या मांग की है?
उत्तर: उन्होंने मांग की है कि सरकार वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के आधार पर सूची को तुरंत संशोधित करे और प्रभावित किसानों को वित्तीय मुआवजा प्रदान करे।

क्या आप जानते हैं?: कर्नाटक के कई जिले वर्षा की कमी के कारण 'सूखा बेल्ट' के रूप में जाने जाते हैं, जहाँ कृषि पूरी तरह से मानसून पर निर्भर है।