अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी उन सभी महिलाओं के साथ हैं जो न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और पत्रकारों के साथ हुई कथित बदसलूकी पर कड़ा रुख अपनाया है।

  • अलका लांबा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी न्याय के लिए लड़ रही महिलाओं के साथ हैं।
  • जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता पर हमले के लिए सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
  • पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के साथ हुई कथित मारपीट पर पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग।
  • छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की हिरासत को लेकर भी कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया।

नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और CWC विशेष आमंत्रित सदस्य अलका लांबा ने एक शक्तिशाली संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी उन सभी 'बेटियों' के साथ खड़ी है जो न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

लांबा ने विशेष रूप से जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने निशु आजाद, पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान, तथा छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है।

बदसलूकी और हिंसा पर कड़ा रुख

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लांबा ने निशु आजाद के पिता के साथ कथित हमले का मुद्दा उठाते हुए 'हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर' स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारद्वाज ने एक वीडियो में हिंसा का महिमामंडन किया और दलितों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया।

इसके अलावा, उन्होंने पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान के साथ हुई कथित बदसलूकी पर भी चिंता व्यक्त की। इन पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस पर साकेत में ड्यूटी के दौरान लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया था। लांबा ने इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के तत्काल निलंबन और घटना के सीसीटीवी फुटेज जारी करने की मांग की है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और महिला सुरक्षा के बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस का यह रुख आगामी राजनीतिक संघर्षों में महिलाओं के अधिकारों को एक प्रमुख एजेंडे के रूप में स्थापित करने का प्रयास है।

"लोकतांत्रिक विरोध के दौरान महिलाओं और उनके परिवारों के साथ होने वाली हिंसा नागरिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।"

लांबा ने नोएडा में छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की गिरफ्तारी का भी मुद्दा उठाया, जिसकी हिरासत को बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था। कांग्रेस ने इन सभी मामलों को न्याय और समानता की लड़ाई के रूप में देखा है।

Did You Know?: भारत में जंतर-मंतर दशकों से नागरिक अधिकारों और विभिन्न सामाजिक आंदोलनों के लिए सबसे प्रमुख विरोध स्थल रहा है।

Frequently Asked Questions

1. अलका लांबा ने किन महिलाओं का समर्थन किया है?
उन्होंने निशु आजाद, पत्रकार शाहीन खान, नफीसा खान और आकृति चौधरी का समर्थन किया है।

2. पत्रकारों के साथ क्या घटना हुई थी?
पत्रकारों ने आरोप लगाया कि साकेत में एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली पुलिस ने उनके साथ मारपीट की।