जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने 'फ्री फिलिस्तीन' के नारों को सही ठहराने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक बयान का सहारा लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद दीवारों को सफेदी करने के बावजूद छात्र फिर से राजनीतिक पोस्टर और ग्राफिटी लगा रहे हैं।
- जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने 'फ्री फिलिस्तीन' ग्राफिटी का समर्थन करने के लिए पूर्व पीएम वाजपेयी के 1977 के बयान का उपयोग किया।
- मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विश्वविद्यालय की ग्राफिटी को 'राष्ट्र विरोधी' करार देते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
- विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस द्वारा दीवारों को सफेदी करने के बाद भी छात्र फिर से पोस्टर और ग्राफिटी लगा रहे हैं।
- ABVP और वामपंथी छात्र गुटों के बीच कैंपस में वैचारिक युद्ध छिड़ गया है।
कोलकाता के प्रतिष्ठित जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University) में राजनीतिक खींचतान एक नए स्तर पर पहुंच गई है। गुरुवार को विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का एक ऐतिहासिक पोस्टर लगाया। इस पोस्टर में वाजपेयी जी का वह बयान शामिल है जिसमें उन्होंने कहा था, 'इजरायल को अरबों की वे भूमि वापस करनी चाहिए जिस पर उसने कब्जा किया है। फिलिस्तीनियों के कानूनी अधिकारों को स्थापित किया जाना चाहिए।'
छात्रों ने इस पोस्टर को 'जादवपुर विश्वविद्यालय के राष्ट्रवादी छात्रों' के नाम से जारी किया है। दिलचस्प बात यह है कि इस पोस्टर में एक QR कोड भी शामिल है, जो वाजपेयी जी के उस पूर्ण भाषण से जुड़ा है जो उन्होंने 1977 में दिल्ली में दिया था। छात्रों का तर्क है कि वे किसी राष्ट्र-विरोधी एजेंडे का नहीं, बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री के विचारों का समर्थन कर रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह घटना केवल कैंपस की राजनीति नहीं है, बल्कि यह भारत के वैचारिक ध्रुवीकरण का प्रतिबिंब है। एक तरफ सरकार और प्रशासन दीवारों पर लिखे राजनीतिक संदेशों को 'राष्ट्र विरोधी' मानकर मिटा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्र ऐतिहासिक संदर्भों का उपयोग करके अपने दावों को वैधता प्रदान कर रहे हैं। यह संघर्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय अखंडता के बीच की धुंधली रेखा को दर्शाता है।
इतिहास के राजनीतिक बयानों का उपयोग वर्तमान के विवादित मुद्दों को जायज ठहराने के लिए करना छात्र राजनीति की एक नई और जटिल रणनीति बन गया है।
इससे पहले, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर की दीवारों से 'कश्मीर आज़ादी' और 'फ्री फिलिस्तीन' जैसे नारों को मिटाने के लिए सफेदी करवाई थी। हालांकि, पुलिस और नगर निगम के हस्तक्षेप के बावजूद, छात्र फिर से दीवारों पर कार्ल मार्क्स, हो ची मिन्ह और अन्य क्रांतिकारी विचारों के ग्राफिटी पेंट कर रहे हैं।
इस वैचारिक युद्ध में ABVP ने भी मोर्चा खोल दिया है। वामपंथी छात्रों के ग्राफिटी के जवाब में, ABVP ने परिसर में रवींद्रनाथ टैगोर, विद्यासागर और वंदे मातरम के पोस्टर लगाए हैं। इससे परिसर में दो अलग-अलग विचारधाराओं के बीच स्पष्ट विभाजन दिखाई दे रहा है।
Historical Background
अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 में जब पहली बार जनता पार्टी सरकार के तहत विदेश मंत्री का कार्यभार संभाला था, तब उन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर एक संतुलित दृष्टिकोण रखने की वकालत की थी। छात्रों द्वारा उनके इसी बयान का उपयोग करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि अब वे सीधे तौर पर एक पूर्व प्रधानमंत्री के शब्दों को ढाल बना रहे हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: छात्र वाजपेयी के बयान का उपयोग क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: छात्र 'फ्री फिलिस्तीन' के नारों को 'राष्ट्र विरोधी' कहे जाने के विरोध में वाजपेयी के ऐतिहासिक रुख का उपयोग कर रहे हैं ताकि वे अपने विचारों को वैध बना सकें।
प्रश्न 2: मुख्यमंत्री का इस मामले पर क्या रुख है?
उत्तर: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इन ग्राफिटी को राष्ट्र-विरोधी बताया है और प्रशासन को इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।