कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चीन की विदेश नीति की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि बीजिंग का भारत और नेपाल के प्रति दृष्टिकोण केवल 'लेनदेन' तक सीमित है, जिसमें कोई वास्तविक मित्रता नहीं है।

  • शशि थरूर ने चीन की कूटनीतिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • बीजिंग के व्यवहार को भारत और नेपाल के प्रति केवल स्वार्थपूर्ण और लेनदेन आधारित बताया।
  • क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चीन की 'लेनदेन वाली नीति' को एक चुनौती माना।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने चीन की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार किया है। थरूर ने एक बेहद तीखे कटाक्ष के साथ कहा है कि चीन की 'आंखों का पानी मर गया है' और उसका व्यवहार पड़ोसियों के प्रति केवल लाभ-हानि पर आधारित है। उनके इस बयान ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में चीन के बढ़ते प्रभाव और उसकी संदिग्ध मंशा पर नई बहस छेड़ दी है।

थरूर का तर्क है कि चीन, भारत और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को केवल एक 'लेनदेन' (transactional) के रूप में देखता है। उनके अनुसार, बीजिंग का कोई भी सहयोग या कूटनीतिक कदम केवल उसके अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को साधने के लिए होता है, न कि क्षेत्रीय शांति या विकास के लिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि थरूर का यह बयान उस समय आया है जब दक्षिण एशिया में चीन का 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' और बुनियादी ढांचा निवेश (BRI) कई देशों की संप्रभुता के लिए खतरा माना जा रहा है। भारत और नेपाल के बीच के द्विपक्षीय संबंधों में चीन की घुसपैठ को रोकने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक टिप्पणी है।

चीन की कूटनीति में मित्रता का कोई स्थान नहीं है, वहां केवल व्यापारिक और सामरिक हितों का गणित चलता है।

नेपाल में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं और ग्लेशियर फटने की घटनाओं के बीच, चीन की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जहाँ भारत नेपाल की सहायता के लिए तत्पर रहता है, वहीं चीन का रवैया अक्सर केवल अपनी शर्तों पर आधारित होता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दशकों से, चीन ने दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता का उपयोग एक हथियार के रूप में किया है। नेपाल जैसे छोटे देशों में बुनियादी ढांचे के निर्माण के नाम पर चीन ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जिससे भारत की पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में चुनौती पैदा हुई है।

Did You Know?: नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंध हैं, जो चीन के साथ संबंधों की तुलना में कहीं अधिक गहरे हैं।

Frequently Asked Questions

1. शशि थरूर ने चीन के बारे में क्या कहा?
थरूर ने कहा कि चीन का भारत और नेपाल के साथ व्यवहार केवल लेनदेन वाला है और उसमें नैतिकता की कमी है।

2. चीन का 'लेनदेन वाला रवैया' क्या है?
इसका अर्थ है कि चीन केवल तभी मदद या सहयोग करता है जब उसे बदले में कोई सामरिक या आर्थिक लाभ प्राप्त हो।