आंध्र प्रदेश सरकार ने शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए नए नियम जारी किए हैं, जिससे अब मेयर और नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा। इस ऐतिहासिक बदलाव के तहत अब मेयर का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा।

  • मेयर और नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अब अप्रत्यक्ष के बजाय सीधे मतदाताओं द्वारा किया जाएगा।
  • मेयर और अध्यक्षों का कार्यकाल अब पांच वर्ष निर्धारित किया गया है।
  • डिप्टी मेयर और वाइस-चेयरपर्सन का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली के माध्यम से ही होगा।
  • आरक्षण के लिए एससी, एसटी, बीसी और महिलाओं की पहचान प्रक्रिया 8 सितंबर से शुरू होगी।

आंध्र प्रदेश सरकार ने शनिवार को शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के सामान्य चुनाव कराने के लिए वैधानिक नियम और आदेश जारी कर दिए हैं। इस कदम से राज्य में स्थानीय शासन की संरचना में एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है, क्योंकि अब मेयर और नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता के हाथों में होगा।

संशोधित नगर पालिका कानूनों के तहत, नगर निगमों के मेयर और नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के अध्यक्षों का चुनाव उन मतदाताओं द्वारा किया जाएगा जिनके नाम संबंधित मतदाता सूची में दर्ज हैं। यह व्यवस्था पहले की उस प्रणाली को समाप्त कर देगी जिसमें निर्वाचित सदस्यों और पात्र पदेन सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव कराए जाते थे।

प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव

नए नियमों में चुनाव अधिसूचना, नामांकन दाखिल करने, जांच, नामांकन वापसी, प्रतीकों का आवंटन, मतपत्रों का उपयोग, ईवीएम (EVM), एनोटा (NOTA), और मतगणना जैसी विस्तृत प्रक्रियाओं को परिभाषित किया गया है। सीधे निर्वाचित मेयर या अध्यक्ष पांच साल की अवधि के लिए पद पर बने रहेंगे और वे अपने संबंधित निगम या नगर पालिका के सदस्य भी होंगे।

सरकार ने प्रशासनिक पदों की संख्या में भी बदलाव किया है। अब प्रत्येक नगर निगम में केवल एक डिप्टी मेयर और प्रत्येक नगर पालिका या नगर पंचायत में एक वाइस-चेयरपर्सन का पद होगा, जो पहले दो-दो हुआ करते थे। इन पदों के लिए चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से ही संपन्न कराए जाएंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सीधे चुनाव की यह प्रणाली स्थानीय निकायों में जवाबदेही और लोकतांत्रिक शक्ति को सीधे जनता से जोड़ने का काम करेगी। इससे राजनीतिक दलों के भीतर आंतरिक गुटबाजी कम हो सकती है और नेतृत्व सीधे जनता के प्रति अधिक उत्तरदायी होगा।

सीधे चुनाव की प्रक्रिया स्थानीय शासन में पारदर्शिता लाएगी और जनता के बीच नेतृत्व की स्वीकार्यता बढ़ाएगी।

वर्तमान में, विज़ियानगरम नगर निगम सहित 59 निकायों में आरक्षण के उद्देश्यों के लिए एससी, एसटी, बीसी और महिला मतदाताओं की पहचान करने का कार्य 8 सितंबर से शुरू होने वाला है। अंतिम मतदाता सूची 21 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी।

Did You Know?: सीधे चुनाव होने से मेयर को स्थानीय प्रशासन में अधिक स्वायत्तता और राजनीतिक शक्ति प्राप्त होती है।

Frequently Asked Questions

1. क्या डिप्टी मेयर का चुनाव भी सीधे होगा?
नहीं, डिप्टी मेयर और वाइस-चेयरपर्सन का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाएगा।

2. मेयर का कार्यकाल कितना होगा?
नए नियमों के अनुसार, मेयर का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा।