कांग्रेस नेता माणिकराव ठाकरे ने आरोप लगाया है कि केंद्र की एनडीए सरकार ओबीसी और ईबीसी वर्गों के प्रतिनिधित्व को रोकने के लिए जानबूझकर जाति जनगणना में बाधा डाल रही है।

  • कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर ओबीसी और ईबीसी के अधिकारों को छीनने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
  • माणिकराव ठाकरे ने बिहार और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण मॉडल को अपनाने की मांग की।
  • कांग्रेस ने आरक्षण की 50% की सीमा को तोड़ने और नई प्रश्नावली तैयार करने का आह्वान किया।

पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के गोवा, दमन और दीव के प्रभारी माणिकराव ठाकरे ने केंद्र की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जानबूझकर देशव्यापी जाति जनगणना को रोकने की कोशिश कर रही है ताकि पिछड़ी जातियों (OBC) और अत्यंत पिछड़ी जातियों (EBC) को उनका वास्तविक प्रतिनिधित्व न मिल सके।

ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार ने ओबीसी और ईबीसी वर्गों को उनका उचित हिस्सा देने से रोकने के लिए एक गहरी साजिश रची है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उनके नेता राहुल गांधीमल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है और सरकार के इरादों को बेनकाब किया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जाति जनगणना केवल एक सांख्यिकीय अभ्यास नहीं है, बल्कि यह भारत के सामाजिक-राजनीतिक ढांचे को बदलने की क्षमता रखती है। यदि सटीक डेटा उपलब्ध होता है, तो यह आरक्षण नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के पुनर्गठन का आधार बनेगा।

ठाकरे ने बिहार के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जब बिहार में 'महागठबंधन' की सरकार थी, तब राहुल गांधी के दबाव के बाद ही राज्य में जाति सर्वेक्षण शुरू हुआ था। उन्होंने तेलंगाना के सफल मॉडल की भी सराहना की और मांग की कि केंद्र सरकार को भी इसी तरह की विशेषज्ञ-आधारित प्रश्नावली अपनानी चाहिए।

जाति जनगणना के बिना पिछड़ों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन करना असंभव है।

कांग्रेस नेता ने यह भी तर्क दिया कि यदि सरकार चाहती, तो वह बिहार के आरक्षण मामले को नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) में शामिल करके अदालती चुनौतियों से बचा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और नीतीश कुमार ने जाति सर्वेक्षण की सिफारिशों को दरकिनार कर पिछड़ों के अधिकारों के साथ समझौता किया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में जाति आधारित आरक्षण का मुद्दा दशकों पुराना है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए 50% की सीमा को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। कांग्रेस अब इस सीमा को तोड़ने और डेटा-आधारित आरक्षण की वकालत कर रही है ताकि हाशिए पर खड़े समुदायों का मुख्यधारा में समावेश सुनिश्चित हो सके।

Did You Know?: भारत में जाति जनगणना का डेटा नीति निर्धारण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह लक्षित विकास योजनाओं के लिए आधार प्रदान करता है।

Frequently Asked Questions

1. कांग्रेस जाति जनगणना के लिए क्या मांग कर रही है?
कांग्रेस ने मांग की है कि राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के परामर्श से एक नई प्रश्नावली तैयार की जाए, जो बिहार और तेलंगाना के मॉडल पर आधारित हो।

2. 'नौवीं अनुसूची' का क्या महत्व है?
नौवीं अनुसूची में शामिल कानूनों को अदालत में चुनौती देना कठिन होता है, जिसका उपयोग सरकार आरक्षण संबंधी कानूनों को सुरक्षित करने के लिए कर सकती थी।