कांग्रेस के विधायक पी.वी. मोहन ने घोषणा की कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है, तो मंगलरू के लिए एक अलग रेलवे डिवीजन स्थापित किया जाएगा। यह निर्णय क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
- मंगलरू रेलवे क्षेत्र को अलग डिवीजन बनाने की मांग जारी
- सभी राजस्व का लगभग ₹1,100 करोड़ हिस्सा कोलटिक केक
- कांग्रेस का वादा: सत्ता आने पर डिवीजन बनाना
मंगलरू, भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित एक प्रमुख बंदरगाह शहर, रेलवे नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
\nकांग्रेस के विधायक पी.वी. मोहन ने शनिवार को अपने कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि यदि कांग्रेस केंद्रीय सरकार में सत्ता पाती है, तो वह मंगलरू के लिए एक अलग रेलवे डिवीजन स्थापित करेगा।
\nउन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में केंद्रीय सरकार द्वारा मंगलरू क्षेत्र को साउथ वेस्टर्न रेलवे (एसडब्ल्यूआर) के मयसूर डिवीजन में जोड़ने के निर्णय को लेकर असंतोष है।
\nमंगलरू क्षेत्र को पालेक्कड़ डिवीजन से अलग करने को एक स्वागत योग्य कदम माना गया, पर मयसूर डिवीजन में शामिल करना लोगों की आकांक्षाओं के विपरीत है।
\nमंगलरू के लिए एक अलग डिवीजन की मांग 10-15 वर्षों से चल रही है, और मोहन ने कहा कि यह मांग जारी रहेगी।
\nकेंद्रीय सरकार ने कोकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड, हैसन- मंगळरू रेलवे डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और न्यू मंगळरू पोर्ट जैसे राजस्व उत्पन्न करने वाले संस्थानों के बावजूद क्षेत्र को पर्याप्त समर्थन नहीं दिया है।
\nWhy This Matters
\nBozokMedia विश्लेषण बताता है कि मंगलरू के लिए अलग डिवीजन से क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और यातायात दक्षता में सुधार संभव है।
\n“मंगलरू के लिए अलग रेलवे डिवीजन से व्यापार और पर्यटन में वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।”\n
Frequently Asked Questions
\n1. क्या कांग्रेस मंगलरू के लिए अलग डिवीजन बनाने का वादा करती है?
\n2. वर्तमान में मंगलरू को किस रेलवे डिवीजन के अंतर्गत रखा गया है?