डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मेल-इन वोटिंग पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में फिर से अपील की है। यह कानूनी लड़ाई आगामी मध्यावधि चुनावों की दिशा तय कर सकती है।

  • ट्रंप प्रशासन ने मेल-इन बैलेट की ट्रैकिंग और रिजेक्शन नियमों के लिए सुप्रीम कोर्ट में आपातकालीन याचिका दायर की है।
  • एक संघीय न्यायाधीश ने पहले ही ट्रंप के कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक बताते हुए रोक लगा दी थी।
  • सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश केतनजी ब्राउन जैक्सन ने इस पर बुधवार तक का समय दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले मेल-इन वोटिंग (डाक द्वारा मतदान) पर नए प्रतिबंध लगाने की अनुमति देने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में एक और अपील की है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब एक संघीय न्यायाधीश ने अमेरिकी डाक सेवा (USPS) को ट्रंप के कार्यकारी आदेश को लागू करने से रोक दिया था।

अमेरिकी जिला न्यायाधीश इंदिरा तलवानी ने शुक्रवार को एक आदेश जारी करते हुए कहा था कि ट्रंप के निर्देश, जो संघीय सरकार को मेल-इन बैलेट के प्रबंधन पर शक्ति प्रदान करते हैं, असंवैधानिक होने की संभावना है। न्यायाधीश ने इस आदेश के समय पर भी सवाल उठाए और कहा कि चुनाव में केवल दो महीने शेष होने के कारण, यह उन लाखों नागरिकों के मताधिकार को खतरे में डालता है जो डाक से मतदान करना चाहते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल प्रक्रियात्मक नहीं है, बल्कि अमेरिकी लोकतंत्र की संरचना से जुड़ा है। अमेरिका में संघीय कार्यालयों के लिए चुनाव राज्यों द्वारा आयोजित किए जाते हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट संघीय सरकार को इन बैलेटों पर नियंत्रण की अनुमति देता है, तो यह राज्यों की स्वायत्तता और चुनावी प्रक्रिया पर एक बड़ा कानूनी मिसाल कायम करेगा।

यह कानूनी संघर्ष केवल मतदान के तरीके के बारे में नहीं है, बल्कि यह इस बारे में है कि चुनाव के नियमों को कौन नियंत्रित करता है—राज्य या केंद्र।

ट्रंप प्रशासन के सॉलिसिटर जनरल जॉन सॉयर ने तर्क दिया है कि यह आदेश राज्यों के चुनावी अधिकारों को नहीं छीनता है, बल्कि केवल 'उचित तैयारी आवश्यकताएं' लागू करता है। प्रशासन का कहना है कि राज्यों को बस बैलेट प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का नाम, पता और बारकोड जानकारी एक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान से ही मेल-इन वोटिंग पर सवाल उठाए हैं, बार-बार बिना किसी ठोस प्रमाण के इसे धोखाधड़ी का जरिया बताया है। हालांकि, डेटा दिखाता है कि मेल-इन वोटिंग का उपयोग दोनों पक्षों के मतदाता करते हैं। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में, चार में से एक पंजीकृत डेमोक्रेट और पांच में से एक पंजीकृत रिपब्लिकन ने डाक से मतदान किया था।

Did You Know?: अमेरिका में मेल-इन वोटिंग का उपयोग केवल डेमोक्रेट्स नहीं करते; रिपब्लिकन मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा भी सुविधा के लिए इसका उपयोग करता है।

Frequently Asked Questions

1. ट्रंप प्रशासन वास्तव में क्या चाहता है?
प्रशासन चाहता है कि डाक सेवा को मेल-इन बैलेट को ट्रैक करने और कुछ विशिष्ट मानदंडों के आधार पर उन्हें खारिज करने की शक्ति मिले।

2. न्यायाधीश ने आदेश पर रोक क्यों लगाई?
न्यायाधीश का मानना है कि यह आदेश राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करता है और मतदाताओं के अधिकारों का हनन कर सकता है।