शीरोमानी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के चुनाव पिछले 15 वर्षों से लंबित हैं। कानूनी विवादों और मतदाता सूचियों पर लगे स्टे के कारण सिख समुदाय का यह 'मिनी-संसद' वर्तमान में संकट में है।

  • SGPC के अंतिम चुनाव 2011 में हुए थे।
  • कानूनी विवादों और अदालती स्टे के कारण नई मतदाता सूची तैयार करने में बाधा आ रही है।
  • वर्तमान हाउस 2016 के संशोधन के बाद से अनिश्चित काल तक बना हुआ है।

शीरोमानी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), जिसे अक्सर सिखों की 'मिनी-संसद' कहा जाता है, वर्तमान में एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट का सामना कर रही है। अमृतसर के पवित्र श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) सहित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार यह संस्था पिछले 15 वर्षों से नए चुनाव कराने में विफल रही है।

Sikh Gurdwaras Act, 1925 के तहत गठित यह निकाय न केवल धार्मिक बल्कि पंजाब की राजनीति में भी अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभाता है। इसमें 170 निर्वाचित सदस्य होते हैं, जो पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। हालांकि, 2011 के बाद से इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक लंबा ठहराव आ गया है।

क्यों रुका है चुनाव का पहिया?

इस देरी के पीछे मुख्य कारण कानूनी पेच और अदालती कार्यवाही हैं। 2011 के चुनावों के बाद, दाढ़ी काटने या ट्रिम करने वाले सिखों के मतदान अधिकारों को लेकर विवाद शुरू हुआ। 2016 में अधिनियम में संशोधन किया गया, जिससे ऐसे सिखों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। इसके बाद, 2016 से पांच साल की अवधि गिनने पर इस हाउस का कार्यकाल 2021 में समाप्त हो जाना चाहिए था।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि धारा 51 के तहत, जब तक नया बोर्ड गठित नहीं होता, मौजूदा हाउस कार्य करना जारी रख सकता है। इसी कानूनी प्रावधान का लाभ उठाते हुए 2011 का सदन आज भी बना हुआ है।

कानूनी जटिलताओं और राजनीतिक हितों के टकराव ने सिख समुदाय की सबसे बड़ी निर्वाचित संस्था को एक अनिश्चित भविष्य में धकेल दिया है।

कानूनी बाधाएं और विवाद

हाल ही में लोकसभा में इस मुद्दे पर चर्चा हुई, जहाँ गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू तो की थी, लेकिन पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं के कारण इस पर 'स्टे' (रोक) लगा दिया गया है।

विवाद का एक बड़ा हिस्सा हरियाणा से जुड़ा है। कुछ नेताओं का तर्क है कि हरियाणा के सिखों को भी SGPC चुनावों में मतदान का अधिकार मिलना चाहिए, भले ही वहां अपनी अलग कमेटी हो। दूसरी ओर, कुछ स्वतंत्र कार्यकर्ताओं का आरोप है कि मौजूदा सत्ताधारी गुट चुनावों को टालने की कोशिश कर रहा है ताकि उनका नियंत्रण बना रहे।

विशेषताSGPC संरचनाप्रभाव
कुल निर्वाचित सदस्य170धार्मिक एवं राजनीतिक नियंत्रण
आरक्षित सीटें30 (महिलाएं)समावेशी प्रतिनिधित्व
अंतिम चुनाव वर्ष201115 साल का अंतराल
Did You Know?: SGPC के पास न केवल धार्मिक अधिकार हैं, बल्कि यह गुरुद्वारों की विशाल संपत्ति और करोड़ों के फंड का प्रबंधन भी करता है।

Frequently Asked Questions

1. SGPC के चुनाव क्यों नहीं हो पा रहे हैं?
मुख्य कारण मतदाता सूचियों की तैयारी पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा लगाया गया कानूनी स्टे है।

2. वर्तमान SGPC सदस्यों का कार्यकाल कब समाप्त होना था?
2016 के संशोधन के बाद, तकनीकी रूप से इनका कार्यकाल 2021 में समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन कानूनी प्रावधानों के कारण वे अभी भी पद पर हैं।