पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवे गौड़ा ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMICP) के मामले में कर्नाटक सरकार पर कानून की अवहेलना करने और निजी हितों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार से तीखे सवाल पूछे हैं।
- एच डी देवे गौड़ा ने BMICP साइट आवंटन प्रक्रिया पर कर्नाटक सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
- पूर्व पीएम ने आरोप लगाया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की अनदेखी कर रही है।
- विवाद का मुख्य केंद्र 1,453 किसानों को आवंटित की जाने वाली साइट्स और NICE कंपनी की भूमिका है।
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री और दिग्गज नेता एच डी देवे गौड़ा ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (BMICP) से जुड़े साइट आवंटन के मामले में राज्य सरकार पर 'कानून के शासन को कमजोर करने' का गंभीर आरोप लगाया है। देवे गौड़ा ने मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को एक खुला पत्र लिखकर सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए हैं।
मामला तब गरमाया जब कर्नाटक कैबिनेट ने Nandi Infrastructure Corridor Enterprises (NICE) को दो महीने का समय देते हुए उन 1,453 किसानों को साइट आवंटित करने का निर्देश दिया, जिनकी जमीनें इस प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई थीं। देवे गौड़ा का तर्क है कि सरकार उन गांवों में साइट बनाने की योजना बना रही है जो पहले से ही सड़क और बुनियादी ढांचे के दायरे में आते हैं, जो कि कानूनी रूप से संदिग्ध है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल भूमि आवंटन का नहीं, बल्कि राज्य के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का है। यदि सरकार कानूनी सीमाओं का उल्लंघन करती है, तो यह भविष्य के सभी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है।
"क्या आपके कैबिनेट में निवेशक बैठे हैं, मुख्यमंत्री जी? राज्य यह जानना चाहता है।" - एच डी देवे गौड़ा का तीखा सवाल।
देवे गौड़ा ने अदालत के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मुआवजे के रूप में ऐसी साइटें नहीं दी जा सकतीं जो सड़क के बुनियादी ढांचे के लिए छोड़ी गई भूमि पर बनाई गई हों। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि क्या NICE के खातों का फोरेंसिक ऑडिट कभी वास्तव में किया जाएगा, क्योंकि सरकार खुद इस परियोजना के माध्यम से निजी हितों को लाभ पहुँचाने में 'सहयोगी' की भूमिका में दिख रही है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहकर ही काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कानूनी राय ले रही है और सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों का पालन करते हुए किसानों के हितों की रक्षा करेगी।
Frequently Asked Questions
1. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद किसानों को मुआवजे के रूप में दी जाने वाली भूमि के आवंटन और NICE कंपनी की भूमिका को लेकर है।
2. देवे गौड़ा ने सरकार पर क्या आरोप लगाया है?
उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है और निजी निवेशकों के हितों की रक्षा कर रही है।