तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में डीएमके पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी फंड के नाम पर ठेकेदारों से 10% तक की रिश्वत ली गई। उन्होंने ईडी के दस्तावेजों का हवाला देते हुए एमके स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन को इसका लाभार्थी बताया।

  • मुख्यमंत्री विजय ने डीएमके पर 'पार्टी फंड' के नाम पर संगठित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
  • ईडी (ED) के दस्तावेजों के अनुसार, ठेकेदारों से अनुबंध मूल्य का 7.5% से 10% तक कमीशन लिया गया।
  • आरोपों में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के नाम सीधे तौर पर शामिल हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा के पटल पर विपक्षी दल डीएमके (DMK) के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। विजय ने अपने संबोधन में कहा कि सत्ता के पिछले कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि एक संगठित तंत्र के रूप में काम कर रहा था, जहाँ रिश्वत लेना एक नियमित प्रक्रिया बन गई थी।

विधानसभा में बोलते हुए विजय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक दस्तावेज़ का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग (MAWS) के ठेकेदारों को सरकारी परियोजनाओं के बदले अनुबंध मूल्य का 7.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक 'पार्टी फंड' के रूप में देने के लिए मजबूर किया गया था। विजय ने इसे केवल रिश्वत नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित वसूली प्रक्रिया बताया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that these allegations target the very core of the DMK's leadership. By linking the corruption directly to the Chief Minister and Deputy Chief Minister through ED documents, Vijay is attempting to shift the narrative from ideological differences to a moral and legal battle. This could potentially trigger further central agency probes and destabilize the opposition's credibility before the next electoral cycle.

जब विपक्षी सदस्यों ने सबूतों की मांग की, तो विजय ने दस्तावेज़ों को पढ़ते हुए स्पष्ट किया कि यह पैसा सीधे तौर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँच रहा था। उन्होंने कहा, "सीधे लाभार्थी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन और कई अन्य अज्ञात अधिकारी और व्यक्ति हैं।"

"जब भ्रष्टाचार को 'पार्टी फंड' का नाम दे दिया जाता है, तो वह व्यक्तिगत लालच से ऊपर उठकर एक संस्थागत अपराध बन जाता है, जो लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक है।"

विजय ने इस बात पर जोर दिया कि यह भ्रष्टाचार केवल कुछ अधिकारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सरकारी तंत्र और राजनीतिक नेतृत्व का गहरा गठजोड़ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाएगी और पुलिसिंग में पारदर्शिता लाएगी।

क्या आप जानते हैं?: तमिलनाडु में 'पार्टी फंड' के नाम पर कमीशन लेने के आरोप पिछले कई दशकों से विभिन्न राजनीतिक दलों पर लगते रहे हैं, लेकिन विधानसभा में ईडी के दस्तावेजों का सीधा उल्लेख करना एक दुर्लभ राजनीतिक कदम है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विजय ने भ्रष्टाचार के लिए किस विभाग का नाम लिया?
उत्तर: विजय ने मुख्य रूप से नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग (MAWS) का उल्लेख किया, जहाँ ठेकेदारों से रिश्वत ली गई।

p>प्रश्न 2: ईडी के दस्तावेज़ों के अनुसार रिश्वत की दर क्या थी?
उत्तर: दस्तावेजों के अनुसार, अनुबंध मूल्य का 7.5% से 10% तक पार्टी फंड के रूप में वसूला गया था।