हरियाणा में अतिथि शिक्षकों का आंदोलन उग्र हो गया है। 2014 की नियमितीकरण नीति लागू करने और अदालती आदेशों का पालन करने की मांग को लेकर शिक्षक पिछले 77 दिनों से कुरुक्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे हैं।

  • अतिथि शिक्षक 2014 की नियमितीकरण नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं।
  • कुरुक्षेत्र सचिवालय के बाहर पिछले 77 दिनों से धरना जारी है।
  • सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला दिया गया है।
  • लगभग 12,000 अतिथि शिक्षक इस मुद्दे से प्रभावित हैं, जिनमें 55% महिलाएं हैं।

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों ने अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है। कुरुक्षेत्र में, जो मुख्यमंत्री नयब सिंह सैनी का गृह जनपद है, सचिवालय के बाहर शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को 77वें दिन भी जारी रहा।

राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ के नेतृत्व में, ये शिक्षक 2014 में राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई नियमितीकरण नीतियों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के हालिया फैसले उनके पक्ष में हैं और सरकार के पास अब कानूनी रूप से कोई विकल्प नहीं बचा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल कुछ शिक्षकों का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य का है। लगभग 12,000 अतिथि शिक्षक संविदा के आधार पर स्वीकृत पदों पर काम कर रहे हैं। इनमें से 55% महिलाएं हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि सरकार इन न्यायिक आदेशों का पालन नहीं करती है, तो यह एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी संकट पैदा कर सकता है।

"सरकार के पास अब कानूनी विकल्प नहीं बचा है क्योंकि अदालतों ने स्पष्ट रूप से हमारे पक्ष में निर्णय दिए हैं।" - दिनेश यादव, राज्य अध्यक्ष, राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ।

विवाद की जड़ में 2014 के दौरान कांग्रेस शासन के दौरान बनाई गई दो नीतियां हैं: एक तीन साल की नीति और दूसरी 10 साल की नीति। संघ का दावा है कि उन्होंने तीन साल वाली नीति की सभी शर्तों को पूरा किया था, लेकिन उन्हें नियमित नहीं किया गया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भाजपा ने अपने 2014 के चुनावी घोषणापत्र में भी इन शिक्षकों को नियमित करने का वादा किया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और कानूनी लड़ाई

शिक्षकों का यह संघर्ष वर्षों पुराना है। 2015 में भाजपा सरकार ने समीक्षा के लिए 2014 की नीति को रोक दिया था। इसके बाद लंबी कानूनी लड़ाई चली। 2018 में हाई कोर्ट ने दोनों नीतियों को रद्द कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। हाल ही में, 16 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल वाली नीति की वैधता को बरकरार रखा, जिससे शिक्षकों की उम्मीदें फिर से जग गई हैं।

शिक्षकों का कहना है कि अब उनकी मांग नई नीति की नहीं, बल्कि केवल अदालती आदेशों के कार्यान्वयन की है। उन्होंने मुख्यमंत्री के आवास का घेराव भी किया है और विधायकों से समर्थन की अपील की है।

क्या आप जानते हैं?: हरियाणा में अतिथि शिक्षक 2005 से 2008 के बीच नियुक्त किए गए थे और वे जूनियर बेसिक से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट स्तर तक पढ़ा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: शिक्षक किस नीति की मांग कर रहे हैं?
उत्तर: शिक्षक 2014 में बनाई गई तीन साल वाली नियमितीकरण नीति के कार्यान्वयन की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न 2: आंदोलन का मुख्य केंद्र कहाँ है?
उत्तर: आंदोलन का मुख्य केंद्र कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र के पास सचिवालय है।