मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर के खिलाफ ₹4.5 करोड़ की धोखाधड़ी की शिकायत पर चल रही जांच की निगरानी की है, जिसमें चुनावी खर्च साबित करने के नाम पर पैसे लेने का आरोप है।

  • पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर पर AIADMK उम्मीदवार धना विमल से ₹4.5 करोड़ ठगने का आरोप है।
  • आरोप है कि यह राशि चुनावी खर्च वहन करने की क्षमता साबित करने के लिए ली गई थी।
  • मद्रास उच्च न्यायालय ने पुलिस को 15 सितंबर, 2026 तक प्रगति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

मद्रास उच्च न्यायालय को सूचित किया गया है कि पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर के खिलाफ दर्ज एक उच्च-प्रोफाइल धोखाधड़ी की शिकायत की औपचारिक जांच चल रही है। इस मामले में ₹4.5 करोड़ की भारी राशि शामिल है, जो कथित तौर पर अलंगुडी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के AIADMK उम्मीदवार धना विमल से ली गई थी।

7 सितंबर, 2026 को हुई सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) अरुण अंबुमणि ने न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन को बताया कि पुदुकोट्टई जिले की इल्लुप्पुर पुलिस ने शिकायतकर्ता को प्रारंभिक जांच के लिए तलब किया है। हालांकि समन 28 अगस्त, 2026 के लिए जारी किया गया था, लेकिन शिकायतकर्ता ने 10 सितंबर, 2026 तक का समय मांगा है।

शिकायत का मुख्य विवरण

यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब धना विमल ने पुलिस को प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश देने की मांग करते हुए एक रिट याचिका दायर की। याचिका के अनुसार, यह घटना 11 नवंबर, 2025 को शुरू हुई जब तत्कालीन AIADMK पुदुकोट्टई जिला सचिव श्री विजयभास्कर ने विमल से संपर्क किया और उनसे चुनावी खर्च उठाने की क्षमता साबित करने के लिए ₹5 करोड़ की व्यवस्था करने को कहा।

विमल का दावा है कि उन्होंने विभिन्न स्रोतों से ₹4.5 करोड़ जुटाए और 11 मार्च, 2026 को पुदुकोट्टई में एक ठेकेदार सोथुपलाई मुरुगेसन के कार्यालय में यह राशि सौंपी। वादा यह था कि उम्मीदवारी की घोषणा के तुरंत बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। हालांकि, उम्मीदवार घोषित होने के बाद, विजयभास्कर ने केवल ₹50 लाख वापस किए, जिससे ₹4 करोड़ की भारी कमी रह गई।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला टिकट वितरण के दौरान राजनीतिक दलों के भीतर 'वित्तीय जांच' या संभावित जबरन वसूली के एक चिंताजनक चलन को उजागर करता है। जब प्रभावशाली पार्टी नेता वित्तीय स्थिरता साबित करने के लिए बड़ी रकम मांगते हैं, तो यह भ्रष्टाचार का रास्ता खोलता है। श्री विजयभास्कर का TVK पार्टी में शामिल होना इस मामले के राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बनाता है।

चुनावी फंडिंग और निजी वित्तीय लेनदेन का मेल अक्सर कानूनी खामियां पैदा करता है, जिसका फायदा राजनीतिक रूप से शक्तिशाली लोग उठाते हैं।

शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि उन्होंने पूर्व मंत्री के एक सहयोगी के पास अपने पिता की अचल संपत्ति गिरवी रखी थी, जिसके बदले में उन्हें ₹10 लाख का वादा किया गया था, लेकिन वह राशि कभी नहीं मिली। विमल का कहना है कि उन्होंने अपना पैसा वापस पाने के लिए विजयभास्कर से 14 बार मुलाकात की, लेकिन उन्हें केवल धमकियां और डराने-धमकाने का सामना करना पड़ा।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय चुनावी कानून के तहत, उम्मीदवारों को हलफनामे में अपनी संपत्ति और देनदारियों की घोषणा करनी होती है, लेकिन राजनीतिक दलों की आंतरिक 'वीटिंग' प्रक्रियाएं काफी हद तक अनियमित रहती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पुलिस जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
इल्लुप्पुर पुलिस ने शिकायतकर्ता को तलब किया है, और मद्रास उच्च न्यायालय ने 15 सितंबर, 2026 तक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

प्रश्न 2: इस धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी कौन है?
मुख्य आरोपी पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर हैं, जो पहले AIADMK के पुदुकोट्टई जिला सचिव के रूप में कार्यरत थे।