तेलंगाना विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन धारा 22A के तहत प्रतिबंधित संपत्तियों की सूची को लेकर भारी हंगामा हुआ। बीजेपी सदस्यों ने सदन के बीच में पहुंचकर भूमि सौदों की न्यायिक जांच की मांग की।

  • बीजेपी ने धारा 22A के तहत प्रतिबंधित भूमि सूची में बड़ी गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया।
  • विपक्ष ने मौजूदा न्यायाधीश द्वारा इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।
  • विधायी मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सरकार की सहमति जताई।

हैदराबाद में तेलंगाना विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत बेहद हंगामेदार रही। सोमवार को सत्र के पहले ही दिन, विपक्षी दलों, विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने पंजीकरण अधिनियम की धारा 22A के तहत प्रतिबंधित संपत्तियों की सूची में बड़ी मात्रा में भूमि शामिल किए जाने के मुद्दे पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बीजेपी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन के बीच (Well of the House) में आ गए। उनका आरोप है कि भूमि सौदों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और उन्होंने मांग की है कि एक वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को 14 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा और मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को शोर-शराबे के बीच सदन छोड़ना पड़ा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the Section 22A issue is not just a legal technicality but a potent political weapon. By targeting the prohibited lands list, the opposition aims to expose alleged corruption in land allotments during the previous regime, potentially alienating the rural electorate and putting the current administration on the defensive regarding its promised reforms.

The inclusion of private lands in the prohibited list often leads to legal deadlocks for owners, making this a highly emotive issue for the common citizen in Telangana.

इस बीच, विधायी मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर संक्षिप्त चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस विषय को प्राथमिकता दी जाएगी और इसे कार्यवाही के पहले मद के रूप में लिया जा सकता है।

सदन में तनाव केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस के दलित विधायकों ने बीआरएस (BRS) एमएलसी मधु की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की। आरोप है कि मधु ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) विधानसभा में इसलिए नहीं आ रहे हैं क्योंकि वह स्पीकर को 'सर' नहीं कहना चाहते। इस बयान के बाद कांग्रेस विधायकों ने केसीआर से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

क्या आप जानते हैं?: पंजीकरण अधिनियम की धारा 22A सरकार को ऐसी संपत्तियों की सूची बनाने की अनुमति देती है जिनका पंजीकरण प्रतिबंधित है, ताकि सरकारी भूमि और बंदोबस्ती भूमि का अवैध हस्तांतरण रोका जा सके।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: धारा 22A प्रतिबंधित भूमि विवाद क्या है?
यह विवाद उन जमीनों से संबंधित है जिन्हें सरकार ने पंजीकरण अधिनियम की धारा 22A के तहत प्रतिबंधित सूची में डाल दिया है, जिससे उनके मालिक उन्हें बेच या ट्रांसफर नहीं कर पा रहे हैं।

p>प्रश्न 2: बीजेपी की मुख्य मांग क्या है?
बीजेपी ने मांग की है कि इन प्रतिबंधित भूमि सूचियों और संदिग्ध भूमि सौदों की जांच एक मौजूदा न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए।