पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी एक विज्ञापन में देवी दुर्गा को पारंपरिक दस के बजाय 11 हाथों के साथ दिखाए जाने पर राज्य में राजनीतिक बवाल मच गया है। तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम ने इसे धार्मिक ग्रंथों का अपमान बताया है, जबकि भाजपा इसे एक तकनीकी त्रुटि मान रही है।

  • पश्चिम बंगाल सरकार के विज्ञापन में देवी दुर्गा को 11 हाथों के साथ दिखाया गया है।
  • हिंदू शास्त्रों के अनुसार देवी 'दशभुजा' (दस हाथों वाली) के रूप में पूजी जाती हैं।
  • तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम ने इस चित्रण को सांस्कृतिक और धार्मिक अपमान बताया है।
  • भाजपा ने इसे विज्ञापन एजेंसी की मानवीय चूक करार दिया है।

पश्चिम बंगाल में आगामी दुर्गा पूजा 2026 की तैयारियों को लेकर जारी एक सरकारी विज्ञापन ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा जारी इस विज्ञापन में देवी दुर्गा को पारंपरिक दस भुजाओं के स्थान पर 11 भुजाओं के साथ चित्रित किया गया है, जिसने धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर बहस छेड़ दी है।

हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों के अनुसार, देवी दुर्गा को 'दशभुजा' के रूप में जाना जाता है, जिनके दस हाथ विभिन्न देवताओं द्वारा दिए गए अस्त्र-शस्त्रों को धारण करते हैं। विज्ञापन में एक अतिरिक्त हाथ और शस्त्र का दिखना, जो किसी भी प्रामाणिक शास्त्र से मेल नहीं खाता, ने राजनीतिक दलों को एक-दूसरे पर हमला करने का मौका दे दिया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। किसी भी सरकारी संचार में धार्मिक प्रतीकों का गलत चित्रण न केवल धार्मिक संवेदनाओं को आहत कर सकता है, बल्कि सत्तारूढ़ या विपक्षी दलों के बीच गहरे राजनीतिक मतभेद भी पैदा कर सकता है।

धार्मिक प्रतीकों का गलत चित्रण अक्सर राजनीतिक ध्रुवीकरण का हथियार बन जाता है, विशेषकर बंगाल जैसे सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील राज्य में।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने इस पर तंज कसते हुए पूछा कि किस शास्त्र के अनुसार दशभुजा अब 2026 के लिए 'एकादशभुजा' बन गई हैं। वहीं, सीपीएम नेता शतरूप घोष ने कटाक्ष किया कि जहाँ देवताओं ने असुर का वध करने के लिए दस हाथ दिए थे, वहीं सरकार ने एक अतिरिक्त हाथ 'उपहार' में दे दिया है।

दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विज्ञापन एजेंसी की एक गलती है जिसे सुधारा जाएगा। उन्होंने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय एक तकनीकी त्रुटि बताया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दुर्गा पूजा के दौरान देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में 'दशभुजा' रूप का विशेष महत्व है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। बंगाल में दुर्गा पूजा का आयोजन विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है और यहाँ के प्रत्येक उत्सव में प्रतीकों की शुद्धता का अत्यधिक महत्व होता है।

Did You Know?: हिंदू पौराणिक कथाओं में देवी दुर्गा के दस हाथ ब्रह्मांड के विभिन्न दिशाओं और शक्तियों के संतुलन का प्रतिनिधित्व करते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विवाद का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: विवाद का मुख्य कारण सरकारी विज्ञापन में देवी दुर्गा को पारंपरिक 10 के बजाय 11 हाथों के साथ दिखाना है।

प्रश्न 2: राजनीतिक दलों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर: TMC और CPM इसे धार्मिक अपमान मान रहे हैं, जबकि भाजपा इसे एजेंसी की गलती बता रही है।