तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय थलपति के एमके स्टालिन शासन के दौरान MISA ऐक्ट के दुरुपयोग के बयान पर भारी हंगामा हुआ। DMK विधायकों के उग्र प्रदर्शन के बाद मार्शल को बुलाकर उन्हें सदन से बाहर निकलवाना पड़ा।

  • मुख्यमंत्री विजय थलपति ने DMK शासन के दौरान MISA ऐक्ट के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
  • DMK विधायकों ने सदन में हंगामा किया, जिसके बाद मार्शल को बुलाकर उन्हें बाहर निकाला गया।
  • विजय ने टास्माक और करूर गिरोह के माध्यम से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।
  • ED ने 1,020 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू सहित 13 लोगों पर केस दर्ज किया है।

तमिलनाडु विधानसभा में आज उस समय अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई जब मुख्यमंत्री विजय थलपति के एक तीखे बयान ने सत्ताधारी DMK पार्टी के विधायकों को उग्र कर दिया। मुख्यमंत्री ने एमके स्टालिन के शासनकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार और राजनीतिक दमन के संदर्भ में MISA (आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम) का उल्लेख किया, जिससे सदन में भारी आक्रोश फैल गया।

हंगामा तब चरम पर पहुंच गया जब DMK के मुख्य विप्र ईवी वेलू ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। DMK विधायक स्पीकर की कुर्सी तक पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होते देख, विधानसभा अध्यक्ष को मार्शल बुलाने पड़े, जिन्होंने विधायकों को जबरन सदन के बाहर निकलवाया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this confrontation marks a significant escalation in the political warfare between the newly formed Tamilaga Vetri Kazhagam (TVK) leadership and the established DMK regime. The invocation of the MISA Act, a controversial law used during the Emergency, is a strategic move by Vijay to paint the previous administration as authoritarian.

"विजय का MISA का उल्लेख करना केवल एक बयान नहीं, बल्कि DMK की राजनीतिक विरासत पर सीधा हमला है जो मतदाताओं की भावनाओं को झकझोर सकता है।"

मुख्यमंत्री विजय ने भ्रष्टाचार के आरोपों को और गहराते हुए 2021 से 2025 के बीच राज्य में सक्रिय एक कथित 'करूर गिरोह' का खुलासा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर शराब (TASMAC) के अवैध लेनदेन और टेंडर में भारी अनियमितताएं की गईं। विजय के अनुसार, यह पूरा तंत्र तत्कालीन मंत्री सेंथिल बालाजी के प्रभाव क्षेत्र में संचालित हो रहा था।

भ्रष्टाचार के इन आरोपों को बल देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रियता भी सामने आई है। ED ने सरकारी निविदाओं में 1,020 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू को मुख्य आरोपी बनाते हुए 12 अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इसमें पार्टी के पूर्व विधायकों को भी शामिल किया गया है, जिन पर रिश्वतखोरी और निविदाओं को प्रभावित करने का आरोप है।

Did You Know?: MISA (Maintenance of Internal Security Act) एक अत्यधिक विवादास्पद कानून था जिसका उपयोग आपातकाल के दौरान राजनीतिक विरोधियों को बिना मुकदमे के हिरासत में लेने के लिए किया जाता था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विधानसभा में हंगामा क्यों हुआ?
उत्तर: मुख्यमंत्री विजय थलपति द्वारा एमके स्टालिन सरकार के दौरान MISA ऐक्ट के दुरुपयोग का जिक्र करने के कारण DMK विधायक नाराज हो गए।

प्रश्न 2: ED ने किस मामले में FIR दर्ज की है?
उत्तर: ED ने सरकारी निविदाओं में 1,020 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू के खिलाफ मामला दर्ज किया है।