शिवसेना (UBT) नेता और पूर्व मुंबई मेयर विशाखा राउत को उनके ओबीसी प्रमाण पत्र के अमान्य होने के बाद बीएमसी कॉर्पोरेटर के पद से हटा दिया गया है। उन्हें छह साल के लिए चुनाव लड़ने से भी रोक दिया गया है।
- पूर्व मुंबई मेयर विशाखा राउत का ओबीसी प्रमाण पत्र अमान्य पाया गया।
- महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें 6 साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया है।
- रौत ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।
- वह वर्तमान कार्यकाल में अमान्य जाति प्रमाण पत्र के कारण निष्कासित होने वाली पांचवीं बीएमसी कॉर्पोरेटर हैं।
मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब शिवसेना (UBT) नेता और पूर्व मेयर विशाखा राउत को उनके ओबीसी (OBC) प्रमाण पत्र के अमान्य घोषित होने के बाद कॉर्पोरेटर के पद से बर्खास्त कर दिया गया। महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग ने यह आदेश जारी किया है, जिसके तहत राउत को आगामी छह वर्षों तक किसी भी चुनाव में खड़े होने से भी रोक दिया गया है।
वर्तमान मेयर रितु तावड़े ने सोमवार को बीएमसी की सामान्य निकाय बैठक के दौरान इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि 20 अगस्त से राउत की सदस्यता समाप्त मानी जाएगी। यह कार्रवाई जाति जांच समिति (Caste Scrutiny Committee) की उस रिपोर्ट के बाद हुई है, जिसमें उनके प्रमाण पत्र को त्रुटिपूर्ण पाया गया था।
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
इस निष्कासन के तुरंत बाद विशाखा राउत ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा की जा रही 'राजनीतिक प्रतिशोध' की कार्रवाई बताया है। राउत ने बीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आमतौर पर बीएमसी के काम में महीनों लग जाते हैं, लेकिन उनके मामले में यह प्रक्रिया इतनी तेजी से क्यों पूरी हुई?
"यह स्पष्ट रूप से विपक्षी शिवसेना (UBT) के पार्षदों को निशाना बनाने की एक पूर्व-नियोजित साजिश है।" - विशाखा राउत का बयान।
रौत ने यह भी संकेत दिया कि यह कार्रवाई अन्य विपक्षी पार्षदों के लिए एक चेतावनी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उन्होंने सत्ता पक्ष का साथ देने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया होता, तो क्या परिणाम कुछ और होते? उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी सदा सर्वंकर द्वारा पहले किए गए बयानों का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने चुनाव रद्द होने की बात कही थी।
BozokMedia विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल एक व्यक्ति के निष्कासन का नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में जातिगत प्रमाण पत्रों की वैधता और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई को दर्शाता है। बीएमसी जैसे बड़े निकाय में इस तरह की कार्रवाई से आने वाले चुनावों में जातिगत समीकरणों और कानूनी प्रक्रियाओं पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
विशाखा राउत दादर के वार्ड 191 से ओबीसी महिला आरक्षित सीट से चुनी गई थीं। उन्होंने शिवसेना की प्रिया सर्वंकर को 197 वोटों के अंतर से हराया था। उल्लेखनीय है कि राउत इस कार्यकाल में जाति प्रमाण पत्र के मुद्दे पर अयोग्य घोषित होने वाली पांचवीं बीएमसी कॉर्पोरेटर बन गई हैं।
| निष्कासित कॉर्पोरेटर | वार्ड संख्या | पार्टी |
|---|---|---|
| रोशन शेख | 138 | ओबीसी महिला आरक्षित |
| बुशरा नदीम मलिक | 170 | ओबीसी महिला आरक्षित |
| शमीर रमजान पटेल | 137 | AIMIM |
| दीपक सावंत | 111 | शिवसेना (UBT) |
| विशाखा राउत | 191 | शिवसेना (UBT) |
Frequently Asked Questions
1. विशाखा राउत को कितने समय के लिए प्रतिबंधित किया गया है?
उन्हें छह साल के लिए किसी भी चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
2. क्या राउत ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी?
हाँ, उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।