ओडिशा में INDIA गठबंधन के दलों ने नए खनन कानून के विरोध में 29 सितंबर को विधानसभा के 'घेराव' और राज्यव्यापी अभियान का आह्वान किया है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार राज्य के वित्तीय अधिकारों को छीन रही है और राजस्व का भारी नुकसान कर रही है।

  • INDIA गठबंधन 29 सितंबर, 2026 को ओडिशा विधानसभा का घेराव करेगा।
  • विरोध का मुख्य कारण 'खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026' है।
  • आरोप है कि केंद्र के हस्तक्षेप से राज्य को लाखों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।
  • मांगों में अधिनियम को रद्द करना और आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन के अधिकारों की रक्षा शामिल है।

ओडिशा की राजनीति में एक बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। INDIA गठबंधन के दलों ने 29 सितंबर को ओडिशा विधानसभा के 'घेराव' और एक राज्यव्यापी अभियान की घोषणा की है। यह विरोध खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के खिलाफ है, जिसे विपक्षी नेता राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों पर प्रहार बता रहे हैं।

एक विशेष सम्मेलन में कांग्रेस, CPI, CPI(M), CPI(ML) लिबरेशन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, NCP, समाजवादी पार्टी और RJD जैसे दलों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि यह नया कानून कॉर्पोरेट घरानों के लिए खनिज संसाधनों के शोषण का रास्ता खोलता है और राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करता है। सबसे विवादित मुद्दा यह है कि अब खनिज संसाधनों पर कर लगाने के लिए केंद्र की मंजूरी आवश्यक होगी, जिसे "वित्तीय स्वायत्तता पर गंभीर हमला" करार दिया गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संघीय ढांचे (Federalism) की लड़ाई है। जब राज्य की कर शक्तियों को केंद्र की मंजूरी से जोड़ा जाता है, तो सत्ता का संतुलन राज्यों से हटकर नई दिल्ली की ओर झुक जाता है। ओडिशा जैसे राज्य के लिए, जहाँ लौह अयस्क और बॉक्साइट के विशाल भंडार हैं, पिछले बकाया करों और उपकर (cess) की वसूली न कर पाना राज्य के बजट में भारी कमी ला सकता है, जिससे जन कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित होंगी।

CPI(M) के राज्य सचिव सुरेश पाणिग्राही ने 2024 के सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया, जिसमें खनिज संसाधनों वाले राज्यों के कर लगाने के संवैधानिक अधिकार को मान्यता दी गई थी। विपक्ष का मानना है कि नया कानून इस न्यायिक निर्णय को दरकिनार करने की कोशिश है।

2026 का खनन संशोधन राज्य के संसाधनों को केंद्रीय संपत्ति में बदल देता है, जिससे खनिज समृद्ध राज्य अपने धन के मालिक के बजाय केवल संरक्षक बनकर रह जाते हैं।

वित्तीय नुकसान के अलावा, INDIA गठबंधन ने इसे मानवाधिकारों से जोड़कर देखा है। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन में कहा गया कि यह कानून आदिवासियों के आजीविका अधिकारों और वन अधिकारों के लिए खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि "कॉर्पोरेट लूट" से विस्थापन बढ़ेगा और पर्यावरण का विनाश होगा।

इस वैचारिक लड़ाई को और तेज करने के लिए, वरिष्ठ वामपंथी नेता संतोष दास द्वारा लिखित पुस्तक "मोदीज़ ब्लूप्रिंट फॉर माइनिंग लूट" का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक का उद्देश्य जनता को भाजपा सरकार की खनन नीतियों के खिलाफ जागरूक करना है।

क्या आप जानते हैं?: ओडिशा भारत में लौह अयस्क और बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक है, जिससे यहाँ के खनन कानून पूरे देश की औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: 29 सितंबर को विधानसभा घेराव का मुख्य कारण क्या है?
यह विरोध 'खान और खनिज संशोधन अधिनियम, 2026' के खिलाफ है, जिसके बारे में INDIA गठबंधन का दावा है कि यह ओडिशा के वित्तीय अधिकारों को छीनता है और कॉर्पोरेट शोषण को बढ़ावा देता है।

प्रश्न 2: कथित तौर पर कितने राजस्व का नुकसान हो रहा है?
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि केंद्र द्वारा पिछले बकाया करों और उपकर की वसूली रोकने के कारण राज्य को लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।