हरियाणा के शहरी इलाकों में स्वच्छता कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण कचरे के ढेर लग गए हैं। सरकार और कर्मचारियों के बीच नियमितीकरण (Regularisation) को लेकर चल रहा गतिरोध अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है।

  • 13,093 नगर पालिका कर्मचारियों और 16,500 आउटसोर्सिंग कर्मियों का नियमितीकरण मुख्य मांग है।
  • सरकार और यूनियन के बीच अब तक छह दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
  • हड़ताल के कारण गुरुग्राम, हिसार और रोहतक जैसे शहरों में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पिछले एक महीने से जारी स्वच्छता कर्मियों की हड़ताल ने राज्य के प्रमुख शहरों को कचरे के ढेरों में तब्दील कर दिया है। यह गतिरोध केवल सफाई की समस्या नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार और कामगारों के बीच बढ़ते विश्वास की कमी का भी प्रतीक है।

हड़ताल का मुख्य कारण क्या है?
स्वच्छता कर्मियों ने 6 अगस्त को अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांग नगर पालिका रोल पर कार्यरत 13,093 कर्मचारियों का नियमितीकरण करना है। इसके साथ ही, वे आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे लगभग 16,500 डोर-टू-डोर कचरा संग्रहकर्ताओं को भी स्थायी करने की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में, राज्य में केवल 3,400 नियमित कर्मचारी ही कार्यरत हैं।

क्यों बना हुआ है गतिरोध?

हरियाणा के सामाजिक न्याय मंत्री कृष्ण बेदी के अनुसार, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच छह बैठकें हो चुकी हैं। सरकार का तर्क है कि कर्मचारियों को नियमित करने में कानूनी बाधाएं हैं और वे इस पर कानूनी राय मांग रहे हैं। सरकार का यह भी कहना है कि केवल दो साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मियों को नियमित करने की कोई नीति देश में मौजूद नहीं है।

नियमितीकरण की मांग केवल वेतन वृद्धि के बारे में नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता से जुड़ी है।

दूसरी ओर, हरियाणा नगरपालिका कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नरेश शास्त्री सरकार के दावों को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि मांग 'असंभव' नहीं है और उन्होंने अतीत में कम सेवा अवधि वाले कर्मियों के नियमितीकरण के उदाहरण भी पेश किए हैं।

BozokMedia विश्लेषण: राजनीतिक टकराव और नागरिक संकट

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार के तर्कों को चुनौती देते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान तीन साल की सेवा के बाद नियमितीकरण की नीतियां मौजूद थीं, जिन्हें अदालतों ने भी बरकरार रखा था।

इस राजनीतिक खींचतान के बीच आम जनता को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। गुरुग्राम के सनसिटी टाउनशिप जैसे इलाकों में निवासी निजी तौर पर मजदूर रख रहे हैं, लेकिन वहां भी व्यवस्था पूरी तरह सुचारू नहीं है। हिसार और फतेहाबाद में नगर निगम के अधिकारी पुलिस के साथ मिलकर जेसीबी से कचरा हटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे अक्सर कामगारों और प्रशासन के बीच झड़पें होती हैं।

Did You Know?: रोहतक में कचरे के ढेरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने स्वयं कीटनाशक का छिड़काव किया है।

Frequently Asked Questions

1. स्वच्छता कर्मी किन मुख्य मांगों पर अड़े हैं?
मुख्य मांग 13,093 नगर पालिका कर्मचारियों और 16,500 आउटसोर्सिंग कर्मियों का पूर्ण नियमितीकरण है।

2. सरकार का समाधान क्या है?
सरकार ने कर्मचारियों को 'हरियाणा संविदा कर्मचारी (सेवा सुरक्षा) अधिनियम, 2024' के तहत सुरक्षा देने का प्रस्ताव दिया है, जिसे कर्मचारी खारिज कर रहे हैं।