दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में हॉस्टल गिरने की दुखद घटना के बाद, ABVP ने BJP शासित MCD के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे यह छात्र संगठन अपनी विचारधारा से जुड़ी पार्टी को भी चुनौती देता है।
- सत्य निकेतन में इमारत गिरने से 7 छात्रों की मौत के बाद ABVP ने MCD कमिश्नर संजीव खिरवार के निलंबन की मांग की है।
- संगठन ने राजस्थान, यूपी और कर्नाटक में भी BJP सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं।
- NSUI के विपरीत, ABVP सीधे BJP द्वारा नियंत्रित नहीं है, बल्कि RSS से जुड़ा है, जिससे इसे अधिक स्वायत्तता मिलती है।
संघ परिवार से जुड़े प्रभावशाली छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में एक छात्र हॉस्टल के गिरने के बाद अपने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के विभिन्न परिसरों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं और प्रशासन की लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि ABVP एक ऐसी नगर निगम (MCD) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है जिसे BJP चला रही है, और यह सब एक ऐसी दिल्ली में हो रहा है जहां केंद्र में भी BJP की सरकार है। संगठन की मुख्य मांग MCD कमिश्नर संजीव खिरवार को तुरंत निलंबित करने की है।
विरोध का पुराना इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब ABVP ने BJP के नेतृत्व वाली सरकार या निकाय का विरोध किया हो। एक महीने पहले, राजस्थान में भजन लाल शर्मा सरकार के खिलाफ छात्र संघ चुनाव न कराने पर व्यापक प्रदर्शन किए गए थे। इसी तरह, उत्तर प्रदेश में श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रमों की मान्यता को लेकर ABVP कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ झड़प हुई थी।
2022 में कर्नाटक में गृह मंत्री के आवास पर धावा बोलने से लेकर मध्य प्रदेश के इंदौर में कॉलेजों के भीतर राजनीतिक गतिविधियों का विरोध करने तक, ABVP ने बार-बार यह साबित किया है कि वह छात्रों के मुद्दों पर सत्ताधारी दल से टकराने में नहीं हिचकिचाता।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, ABVP का ढांचा NSUI (कांग्रेस) या SFI (CPI-M) जैसे संगठनों से अलग है। क्योंकि ABVP RSS का एक अंग है न कि BJP की एक सीधी शाखा, इसलिए उसे निर्णय लेने और विरोध करने की अधिक स्वतंत्रता है। यह स्वायत्तता उसे कैंपस में एक स्वतंत्र छवि बनाए रखने में मदद करती है।
ABVP का BJP के खिलाफ प्रदर्शन करना उसकी एक रणनीतिक आवश्यकता है ताकि वह खुद को केवल एक राजनीतिक भर्ती केंद्र के बजाय छात्रों के हितों की रक्षा करने वाले संगठन के रूप में पेश कर सके।
ऐतिहासिक रूप से, ABVP का जन्म 1948 में हुआ था, जो इसे BJP (1980) और जनसंघ (1951) दोनों से पुराना बनाता है। यह वरिष्ठता उसे संघ परिवार के भीतर एक विशेष स्थान देती है, जिससे वह BJP की प्रशासनिक विफलताओं पर सवाल उठा सकता है।
| विशेषता | ABVP | NSUI / SFI / AISA |
|---|---|---|
| मुख्य संबद्धता | RSS / संघ परिवार | सीधे राजनीतिक दलों से जुड़े |
| स्वायत्तता | उच्च (वैचारिक जुड़ाव) | कम (संगठनात्मक नियंत्रण) |
| करियर पथ | विभिन्न संघ संगठन / BJP | युवा विंग → मुख्य पार्टी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यदि विचारधारा एक है, तो ABVP, BJP का विरोध क्यों करता है? उत्तर 1: ABVP खुद को पहले एक छात्र संगठन मानता है। कैंपस में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए, उसे छात्रों की समस्याओं को उठाना पड़ता है, चाहे सरकार किसी भी पार्टी की हो।
प्रश्न 2: ABVP किसके प्रति जवाबदेह है? उत्तर 2: वैचारिक रूप से RSS से जुड़े होने के बावजूद, ABVP शैक्षिक और युवा मुद्दों पर केंद्रित एक स्वतंत्र छात्र निकाय के रूप में कार्य करता है।